अमित दुबे की रिपोर्ट :-
बिलासपुर/रतनपुर। रतनपुर नगर पालिका एक बार फिर गंभीर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। कुछ समय पहले नगर पालिका इंजीनियर श्रीरिल भास्कर द्वारा एक ठेकेदार से WhatsApp के माध्यम से बारकोड भेजकर 50 हज़ार रुपये रिश्वत माँगने और धमकी देने का मामला सामने आया था। अब इस पूरे खेल में सीएमओ खेल कुमार पटेल और अध्यक्ष लवकुश कश्यप की मिलीभगत उजागर होने के आरोप ने नगर पालिका की साख पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
बारकोड बना रिश्वत का सबूत
ठेकेदार विक्रांत तिवारी ने बिलासपुर कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपी थी। आरोप है कि इंजीनियर भास्कर ने उनसे रिश्वत माँगी और साफ चेतावनी दी कि रकम नहीं देने पर उनका कार्य निरस्त कर दिया जाएगा और उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा। तिवारी ने अपनी शिकायत में WhatsApp चैट और बारकोड का स्क्रीनशॉट बतौर सबूत प्रस्तुत किया है।
सिंडिकेट की तरह चल रहा भ्रष्टाचार
सूत्रों का कहना है कि नगर पालिका में अब भ्रष्टाचार एक “सिंडिकेट” की तरह संचालित हो रहा है। इंजीनियर श्रीरिल भास्कर, सीएमओ खेल कुमार पटेल और अध्यक्ष लवकुश कश्यप पर आरोप है कि ये मिलकर ठेकेदारों से मनमानी वसूली कर रहे हैं। अध्यक्ष पर यह भी आरोप है कि वे अपने “चहेते ठेकेदारों” को करोड़ों रुपये के कार्य नियमों को ताक पर रखकर दिलवा रहे हैं। वहीं, शासकीय मद का लाभ अपने सगे-संबंधियों तक पहुँचाने की बात भी सामने आई है।


बाबूविहीन कार्यालय, प्लेसमेंट कर्मचारी और ठेकेदारों का कब्ज़ा
आरोप है कि नई परिषद ने कार्यभार सँभालने के बाद जानबूझकर नगर पालिका को “बाबूविहीन” बना दिया। 7–8 नियमित लिपिक स्तर के कर्मचारियों को फाइल संचालन के बजाय घर-घर कर वसूली और अन्य बाहरी कार्यों में भेज दिया गया। वही अध्यक्ष के चहेते प्लेसमेंट कर्मचारी कर रहे अपनी मनमानी नतीजा यह है कि अब करोड़ों की फाइलें बिना प्रक्रिया और बिना बाबू के चल रही हैं। ठेकेदारों और चुनिंदा व्यक्तियों का कब्जा फाइलों पर होना भ्रष्टाचार का बड़ा सबूत माना जा रहा है। इस बाबत शिकायत संयुक्त संचालक, नगरीय निकाय विभाग, बिलासपुर से भी की गई है।
प्रताड़ना और धमकियाँ
शिकायतकर्ता विक्रांत तिवारी ने कहा कि जब उन्होंने रिश्वत देने से इनकार कर दिया, तो उनके साथ षड्यंत्रपूर्वक प्रताड़ना शुरू कर दी गई। उनके कार्य निरस्त करने का नोटिस जारी किया गया है, पंद्रहवें वित्त आयोग के काम को रोक दिया गया और बैक डेट में नोटिस जारी कर उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी की गई।
शिकायत पीएमओ से एसीबी तक पहुँची
मामले की गंभीरता को देखते हुए ठेकेदार ने अपनी शिकायत की प्रतियाँ प्रधानमंत्री कार्यालय (नई दिल्ली), नगरीय निकाय विभाग रायपुर और एंटी करप्शन ब्यूरो (बिलासपुर) तक भेजी हैं। इस वजह से यह मुद्दा अब प्रदेश स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है।
प्रदेश में हड़कंप, त्वरित कार्रवाई की माँग
WhatsApp बारकोड से रिश्वत माँगने से लेकर नगर पालिका को सुनियोजित रूप से भ्रष्टाचार का अड्डा बनाने तक की घटनाओं ने प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। अब प्रदेशवासियों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि एसीबी और नगरीय निकाय विभाग इस मामले में कितनी त्वरित और कड़ी कार्रवाई करते हैं और कब इस भ्रष्टाचार सिंडिकेट की परतें खुलती हैं।



