नगर पालिका परिषद नारायणपुर द्वारा बस स्टैंड क्षेत्र में वर्षों से छोटे-छोटे चिली एवं ठेले लगाकर अपने परिवार का पेट पालने वाले गरीब व्यवसायियों को हटाने की कार्रवाई तेज कर दी गई है। हैरानी की बात यह है कि नगरपालिका जिन ठेला व्यवसायियों को हटाना चाहती है, उनके लिए अब तक कोई उचित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
व्यवसायियों को जिस स्थान पर भेजा जा रहा है, वह श्मशान घाट के सामने का क्षेत्र बताया जा रहा है, जहां बारिश के दिनों में तालाब का पानी भरता है और पानी निकासी का मुख्य बहाव भी उसी जगह से होता है। ऐसे स्थान पर ठेला लगाने का मतलब गरीबों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
ठेला व्यवसायियों का कहना है कि वे प्रशासन के निर्णय का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनकी केवल इतनी मांग है कि बारिश खत्म होने तक उन्हें वर्तमान स्थान पर ही व्यवसाय करने दिया जाए और उसके बाद किसी सुरक्षित एवं व्यवस्थित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
व्यवसायियों ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को आवेदन देने का प्रयास किया, लेकिन आवेदन लेने से ही इंकार कर दिया गया। मजबूर होकर उन्हें अपना आवेदन सुशासन तिहार शिविर में जमा कराना पड़ा। अब शहर में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर यह “सुशासन” है या फिर “सुस्त शासन”, जहां गरीबों की सुनवाई तक नहीं हो रही।
इधर कांग्रेस पार्षद जय वट्टी ने नगरपालिका की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहले गरीब व्यवसायियों के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए, उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नगरपालिका छोटे व्यवसायियों को लगातार परेशान कर रही है।
कांग्रेस पार्षद ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि गरीबों के साथ इसी तरह अन्याय और अत्याचार होता रहा तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने प्रशासन से तत्काल मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और गरीब ठेला व्यवसायियों को राहत देने की मांग की।



