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बुलंद टाइम्स न्यूज/सुरेश सोनी
अबूझमाड़ के दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में तैनात 44वीं वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के सीओबी धोबे, सीओबी डोडीमार्का, सीओबी पाड़मेटा, सीओवी लंका एवं सामरिक मुख्यालय सुपगांव कैंपों में रक्षाबंधन का पावन पर्व स्थानीय ग्रामीणों के साथ हर्षोल्लास एवं आत्मीयता के साथ मनाया गया।
अबूझमाड़ अपने दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र, घने जंगलों और सीमित आवागमन सुविधाओं के कारण लंबे समय से देश के कठिन क्षेत्रों में शामिल रहा है। ऐसे दूरस्थ गांवों में तैनात सुरक्षा बल केवल सुरक्षा दायित्वों का निर्वहन ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय समुदाय के साथ निरंतर संवाद एवं सहभागिता के माध्यम से विश्वास और आपसी संबंधों को मजबूत करने का प्रयास भी कर रहे हैं।
इसी भावना के तहत रक्षाबंधन के अवसर पर आसपास के गांवों की महिलाओं एवं बालिकाओं ने कैंपों में पहुंचकर जवानों की कलाई पर राखी बांधी तथा उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। जवानों ने भी ग्रामीण बहनों का आत्मीय स्वागत करते हुए उनके सुख, समृद्धि एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
दूरस्थ एवं कठिन परिस्थितियों में अपने परिवारों से दूर रहकर राष्ट्र की सेवा कर रहे जवानों के साथ स्थानीय बहनों द्वारा रक्षाबंधन मनाना भावनात्मक रूप से विशेष रहा। इस दौरान जवानों एवं ग्रामीणों के बीच प्रेम, विश्वास, अपनत्व और भाईचारे का वातावरण देखने को मिला।
ग्रामीण महिलाओं एवं बालिकाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इन कैंपों में रक्षाबंधन की खुशियों को और बढ़ा दिया। इस अवसर पर जवानों ने भी ग्रामीणों के साथ पर्व की खुशियां साझा कीं और उन्हें हर संभव सहयोग एवं सुरक्षा का विश्वास दिलाया।
रक्षाबंधन का यह आयोजन अबूझमाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में सुरक्षा बल एवं स्थानीय समुदाय के बीच मजबूत होते विश्वास, सामाजिक समरसता और आपसी सौहार्द का सुंदर उदाहरण बना।
रक्षाबंधन के पावन पर्व ने अबूझमाड़ की दूरस्थ धरती पर भाई-बहन के रिश्ते के साथ-साथ जवानों और ग्रामीणों के बीच विश्वास एवं अपनत्व की डोर को भी और मजबूत किया।




