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धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के तिथि-निर्णय के आधार पर 14 सितंबर को व्रत रखने का दावा, 13 सितंबर को तृतीया आरंभ लेकिन अगले दिन भी तृतीया विद्यमान।
बुलंद टाइम्स न्यूज/अमित दुबे
रतनपुर। हरितालिका तीज व्रत को लेकर इस वर्ष महिलाओं और श्रद्धालुओं के बीच 13 सितंबर या 14 सितंबर को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच मां मंगला गौरी धाम पोड़ी रतनपुर से दैवज्ञ पंडित रमेश शर्मा अन्ना महाराज ने धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु तथा पंचांग में दिए गए तिथि-निर्णय के आधार पर स्पष्ट किया है कि हरितालिका तीज का व्रत सोमवार, 14 सितंबर 2026 को रखना शास्त्रीय दृष्टि से उचित है।
पंडित रमेश शर्मा के अनुसार, इस वर्ष 13 सितंबर 2026, रविवार को प्रातः 7:16 बजे तृतीया तिथि प्रारंभ होगी, जबकि 14 सितंबर सोमवार को प्रातः 7:18 बजे तक तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी। ऐसे में 14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया का अस्तित्व बना हुआ है।
केवल तृतीया आरंभ को आधार मानना पर्याप्त नहीं
पंडित शर्मा ने बताया कि 13 सितंबर को तृतीया प्रारंभ होने के कारण कुछ पंचांगों में इस दिन हरितालिका तीज मनाने का उल्लेख किया जा सकता है। हालांकि, हरितालिका व्रत के लिए केवल तृतीया के प्रारंभ होने को देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए शास्त्रों में बताए गए विशेष तिथि-निर्णय का भी ध्यान रखा जाता है।
उन्होंने धर्मसिंधु में दिए गए सिद्धांत का उल्लेख करते हुए बताया कि हरितालिका व्रत के लिए परवर्ती तृतीया को ग्रहण करने का विधान बताया गया है। अर्थात यदि अगले दिन तृतीया अल्प समय के लिए भी विद्यमान हो तो परवर्ती दिन की तृतीया ग्रहण की जाती है।
निर्णयसिंधु में भी परवर्ती तृतीया को महत्व
पंडित रमेश शर्मा ने निर्णयसिंधु के पृष्ठ संख्या 197 का हवाला देते हुए बताया कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरितालिका व्रत का विधान है और ऐसी स्थिति में परवर्ती तृतीया को ग्रहण करने का उल्लेख मिलता है।
उन्होंने बताया कि शास्त्रीय मत के अनुसार अगले दिन तृतीया थोड़े समय के लिए भी उपलब्ध हो और चतुर्थी के साथ उसका संयोग हो, तो परवर्ती तृतीया को ग्रहण करने का विधान है। इसी आधार पर इस वर्ष 14 सितंबर की तिथि को अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।
14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया
ऋषिकेश पंचांग के अनुसार 13 सितंबर को सुबह 7:16 बजे तृतीया प्रारंभ होगी और 14 सितंबर को सुबह 7:18 बजे तक तृतीया रहेगी। इसके बाद चतुर्थी का आरंभ होगा।
इस प्रकार 14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहने के कारण पंडित रमेश शर्मा का कहना है कि हरितालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाना शास्त्रीय तिथि-निर्णय के अनुरूप है।
सोशल मीडिया नहीं, शास्त्रीय तिथि-निर्णय पर भरोसा करने की अपील
पंडित शर्मा ने श्रद्धालुओं से अपील की कि हरितालिका तीज जैसे महत्वपूर्ण व्रत की तिथि को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित अलग-अलग जानकारियों के बजाय प्रमाणित पंचांग और शास्त्रीय तिथि-निर्णय को आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि तिथि के आरंभ और समाप्ति के साथ-साथ व्रत विशेष के लिए शास्त्रों में निर्धारित नियमों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
हरितालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इस अवसर पर महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन, अखंड सौभाग्य और पारिवारिक मंगल की कामना के साथ व्रत एवं पूजा करती हैं।
पंडित रमेश शर्मा ने भगवान शिव और माता पार्वती से सभी माताओं-बहनों के लिए अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य, आरोग्य, समृद्धि एवं पारिवारिक मंगल की कामना की। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ उमायै नमः” के जाप के साथ तीज पर्व मनाने का संदेश दिया।




