रामेश्वर सिंह क्षत्रिय जांजगीर-चांपा
जांजगीर चांपा — चार धाम में एक धाम जिसे बैकुंठ धाम के नाम से जाना जाता है भगवान बद्री विशाल( उत्तराखंड ) के दर्शन कर सभी योग शिक्षकों ने तप्त कुंड में स्नान कर भगवान बद्री विशाल के दर्शन किए दिनांक 10 अक्टूबर को प्रातः कालभोर में 4:00 बजे तप्त कुंड( गर्म जल ) प्रकृति के दिव्य अद्भुत नजारा हिमालय की चोटी पर बसा भारत का प्रथम गांव माणा जहां भगवान वेदव्यास जी महाराज व श्री गणेश जी बैठकर 18 पुराण लिखें मां सरस्वती नदी का उद्गम स्थल जहां से द्रोपदी के साथ पांडव लोग स्वर्ग की ओर प्रस्थान किये वहां का भी दिव्य दर्शन प्राप्त हुआ|
भगवान बद्री विशाल की कृपा से हमें चौथी बार पहुंचने का अवसर मिला पितृपक्ष का समय अत्यंत दुर्लभ था जहां पर पितरों का मां अलकनंदा नदी के किनारे अंतिम पिंडदान किया जाता है शास्त्रों में यह उल्लेखित है पिंडदान के लिए बद्रीनाथ जी को सुप्रीम कोर्ट माना जाता है इसके बाद कहीं भी पिंडदान नहीं होता ऐसा शास्त्रों में उल्लेखित है अगर कोई व्यक्ति फिर बद्रीनाथ की बजाय पिंडदान करें तो फिर से उसे वही जाना पड़ता है कहां गया है कि जब तक आप कपाल पिंड नहीं करेंगे तब तक पितरों का उद्धार नहीं होता सात पीढ़ीयों बद्रीनाथ में पिंडदान होता है|
वहां के पंडा लोग बहुत विधि विधान से सात पीढ़ीयों को याद करा कर 100% सही ढंग से यजमानों को पिंडदान करते हैं कुछ लोग गया जी के बाद पिंडदान को अंतिम मान लेते हैं परंतु ऐसा नहीं है क्योंकि शमशान घाट में दाह संस्कार के बाद कपाल क्रिया होती है और कपाल पिंड बद्रीनाथ में ही होता है भारत के कहीं अन्य तीर्थ में नहीं! सभी के भाग्य में ऐसा नहीं होता जिसके भाग्य में लिखा होता है वही वही व्यक्ति वहां पहुंच पाते हैं हमारा भी सौभाग्य था हमने अपनी पूरी टीमों के साथ वहां पहुंचकर पूरे विधि विधान से पितरों का तर्पण किया! तत्पश्चात योग नगरी ऋषिकेश, भारत माता मंदिर, राजा दक्ष मंदिर कनखल, मां मनसा देवी आदि जगहों का दर्शन करते हुए अपने गृह ग्राम को सकुशल वापस लौटे!




