सुरेश सोनी की रिपोर्ट :-
नारायणपुर/खोड़गांव:रावघाट खदान से लौह अयस्क परिवहन करने वाले स्थानीय वाहन मालिकों, श्रमिकों और बेरोजगार युवाओं का सब्र अब जवाब दे चुका है। वर्तमान में चल रही नवीन टेंडर प्रक्रिया में परिवहन दर में बढ़ोतरी न किए जाने से नाराज बूढ़ादेव अंजरेल माइंस श्रमिक विकास समिति एवं उससे संबद्ध यूनियनों ने जिला प्रशासन और भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) प्रबंधन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
दिनांक 13 अक्टूबर 2026 को खोड़गांव के मिनी स्टेडियम में आयोजित एक संयुक्त आपातकालीन बैठक में समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी नारायणपुर तथा महाप्रबंधक (रावघाट परियोजना) को अंतिम चेतावनी का ज्ञापन सौंपा है।
पुरानी दर पर परिवहन करना घाटे का सौदा, गाड़ियों की किश्त चुकाना हुआ मुश्किल
समिति के अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान में नारायणपुर से अंतागढ़ रेल्वे रैक प्वाइंट तक लौह अयस्क परिवहन के लिए BSP द्वारा महज ₹707/- प्रति टन की दर दी जा रही है। रावघाट क्षेत्र की जर्जर और खराब सड़कों के कारण वाहनों में अत्यधिक टूट-फूट हो रही है। इसके साथ ही डीजल, टायर और स्पेयर पार्ट्स की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण इस पुरानी दर पर गाड़ियां चलाना पूरी तरह से घाटे का सौदा साबित हो रहा है। स्थानीय वाहन मालिक बैंकों से ली गई गाड़ियों की मासिक किश्त (EMI) चुकाने में भी असमर्थ हो चुके हैं।
₹910/- प्रति टन स्वीकृत करने की न्यायोचित मांग
क्षेत्र के स्थानीय बेरोजगारों, वाहन मालिकों और श्रमिकों के आर्थिक अस्तित्व को बचाने के लिए समिति ने मांग की है कि वर्तमान में गतिशील नवीन निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में परिवहन की दर को अनिवार्य रूप से बढ़ाकर ₹910/- प्रति टन स्वीकृत किया जाए। इस टेंडर की समय सीमा 17 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है।
उग्र आंदोलन, बाहरी वाहनों का प्रवेश वर्जित और गाड़ियां सरेंडर करने की चेतावनी
समिति ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की गई, तो रावघाट खदान क्षेत्र में संपूर्ण परिवहन कार्य ठप कर उग्र व अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस दौरान खदान क्षेत्र में किसी भी बाहरी वाहन या अन्य ठेकेदार की गाड़ी को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। इसके साथ ही, भारी आर्थिक नुकसान से परेशान होकर सभी वाहन मालिक मजबूरन अपनी गाड़ियां फाइनेंस कंपनियों को सरेंडर (वापस) कर देंगे।
प्रबंधन और प्रशासन की होगी संपूर्ण जिम्मेदारी
समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि स्थानीय बेरोजगारों और श्रमिकों की इस न्यायोचित मांग की अनदेखी की जाती है और इसके कारण क्षेत्र की औद्योगिक शांति भंग होती है, कोई अप्रिय स्थिति निर्मित होती है या भिलाई इस्पात संयंत्र का उत्पादन बाधित होता है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) प्रबंधन और स्थानीय जिला प्रशासन की होगी।




