सुरेश सोनी
नारायणपुर। अबूझमाड़ के विभिन्न क्षेत्रों में नक्सलमुक्ति के बाद त्योहारों की रौनक लौट रही है। कभी नक्सलवाद के प्रभाव के कारण धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां प्रभावित होती थीं, वहीं अब ग्रामीण अपनी आस्था, परंपराओं और संस्कृति के साथ पर्व-त्योहार उत्साहपूर्वक मना रहे हैं। फरलकोट सहित अबूझमाड़ के विभिन्न क्षेत्रों में पहली बार धूमधाम से दशहरा मनाए जाने के साथ सोनपुर में भी दशहरा पर्व को लेकर उत्साह देखने को मिला।
दशहरा पर्व के पावन अवसर पर माता दंतेश्वरी मंदिर सोनपुर तथा आगा देव सोनपुर-कुडुमतुला से जुड़ी मंदिर समितियों को सहयोग प्रदान किया गया। माननीय केदार कश्यप द्वारा जिला पंचायत सदस्य श्रीमती शांति नेताम के माध्यम से मंदिर समितियों को पर्व के आयोजन के लिए सहयोग स्वरूप राशि प्रदान की गई। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करना है।
अबूझमाड़ में लौट रही त्योहारों की रौनक
अबूझमाड़ लंबे समय तक नक्सलवाद के प्रभाव में रहा है। इसके चलते क्षेत्र के कई गांवों में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। अब परिस्थितियों में बदलाव के साथ ग्रामीण अपनी पारंपरिक आस्था और रीति-रिवाजों को फिर से उत्साह के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। फरलकोट सहित विभिन्न स्थानों पर रावण दहन और दशहरा उत्सव का आयोजन इसी बदलते माहौल की झलक प्रस्तुत करता है।

परंपरा और आस्था को आगे बढ़ाने की पहल
जिला पंचायत सदस्य श्रीमती शांति नेताम लगातार क्षेत्र के ग्रामीणों के बीच पहुंचकर स्थानीय आयोजनों में सहभागिता कर रही हैं। दशहरा पर्व के अवसर पर मंदिर समितियों को सहयोग राशि उपलब्ध कराने की पहल से धार्मिक आयोजनों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। सोनपुर में माता दंतेश्वरी और आगा देव के प्रति लोगों की आस्था क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दशहरा पर्व के अवसर पर धार्मिक स्थलों और मंदिर समितियों को सहयोग मिलने से ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। अबूझमाड़ में लौटती त्योहारों की रौनक और पारंपरिक आयोजनों में बढ़ती सहभागिता क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।




