विकास भुवाल ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट से :-
बेमेतरा – अनट्रेंड ऑक्सीजन टेक्नीशियन के भरोसे जिला अस्पताल संचालित हो रहा है। वर्तमान में अस्पताल में 3 ऑक्सीजन टेक्नीशियन नियुक्त है, इनमें से किसी के पास भी अनुभव प्रमाण पत्र नहीं है। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन ने अजीब तर्क देते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में यही स्थिति है, क्योंकि जिला अस्पताल सेटअप में ऑक्सीजन टेक्नीशियन का पद नहीं है, इसलिए विकल्पों का उपयोग कर रहे हैं। इन टेक्नीशियन को जीवनदीप समिति से वेतन भुगतान किया जाता है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि इन टेक्नीशियन की कार्य प्रणाली की कोई शिकायत नहीं आई है, लेकिन इनके पास अनुभव प्रमाण पत्र नहीं है। यहां विपरीत परिस्थिति आने पर जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं होगा, क्योंकि अनुभवहीन लोगों को ऑक्सीजन टेक्नीशियन का काम कराया जा रहा है।
सिक्योरिटी गार्ड कर रहा टेक्नीशियन का काम
जिला अस्पताल मे कोरोना काल में लगाए गए ऑक्सीजन प्लांटों के संचालन के लिए आज तक कोई प्रशिक्षित टेक्नीशियन नियुक्त नहीं किया गया है। हालात ऐसे हैं कि जिला अस्पताल में जिंदगी का सिस्टम (ऑक्सीजन प्लांट) सिक्योरिटी गार्ड चला रहे हैं, जिससे मरीजो की जान खतरे मे पड़ सकती है।
ऑक्सीजन टेक्नीशियन के लिए यह योग्यता जरूरी
जिला अस्पताल में ऑक्सीजन टेक्निशियन बनने के लिए 12वीं ( फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) पास व डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी या संबंधित क्षेत्र जैसे रेस्पिरेटरी थेरेपी, क्रिटिकल केयर नर्सिंग या पैरामेडिकल साइंस में डिप्लोमा या सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है, साथ ही मेडिकल गैस सिस्टम, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन प्लांट के रखरखाव का ज्ञान और अनुभव होना ज़रूरी है, जिसमें आईटीआई सर्टिफिकेट भी काम आ सकता है।
कोरोना काल में इंस्टॉल 4 प्लांट में से 3 खराब
जिला अस्पताल में कोरोना काल के दौरान 4 ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए थे। जिसमें एक ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता 1000 एलपीएम लीटर प्रति मिनट, दूसरे प्लांट की क्षमता 500 एलपीएम, तीसरे प्लांट की क्षमता 300 एलपीएम एवं चौथे प्लांट की क्षमता 250 एलपीएम है। इस तरह कुल 4 प्लांटो की स्थापना की गई थी, इनमें से 2 प्लांट इंस्टालेशन के कुछ दिनों बाद से ही खराब पड़े हैं। इनकी मरम्मत की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा प्रबंधन के अनुसार अभी इन खराब प्लांट की उपयोगिता नहीं है।
कोरोना काल में मिले प्रशिक्षण के आधार पर नियुक्ति
अनट्रेंड ऑक्सीजन टेक्नीशियन की नियुक्ति के संबंध में अस्पताल प्रबंधन संतोषजनक जवाब देने की स्थिति में नहीं दिखे। यहां सिविल सर्जन लोकेश साहू ने बताया कि उनकी ज्वाइनिंग को कुछ ही महीने हुए हैं, यह मामला संज्ञान में आने के बाद प्रबंधन से जानकारी मांगी गई है। जिसमें तीनो टेक्नीशियन के पास अनुभव प्रमाण पत्र नहीं होना बताया गया है, उन्हें कोरोना काल में मिले प्रशिक्षण के आधार पर रखा गया है।
नियुक्ति के संबंध में शासन को नहीं दी गई है जानकारी
कवर्धा जिला अस्पताल सिविल सर्जन केशव ध्रुव से जानकारी मांगने पर बताया कि उनके यहां 2 ऑक्सीजन टेक्नीशियन नियुक्त है, दोनों के पास अनुभव प्रमाण पत्र है। इन्होंने दुर्ग की एक संस्था में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके विपरीत बेमेतरा जिला अस्पताल मे अनुभवहीन ऑक्सीजन टेक्नीशियन की सेवा लेने की जानकारी शासन को देने के सम्बन्ध मे पूछने पर सिविल सर्जन गोलमोल जवाब देने लगे, यह स्पष्ट है कि इन अनट्रेंड कर्मियों की सेवा लेने की जानकारी शासन को नहीं दिया गया है।



