अमित दुबे की रिपोर्ट:-
रतनपुर।स्थानीय आदिवासी माघी पूर्णिमा मेला आस्था, परंपरा और मनोरंजन का संगम माना जाता है, लेकिन इस बार मेला प्रशासनिक अव्यवस्था और झूला ठेकेदारों की मनमानी के कारण लगातार विवादों में बना हुआ है। मेले में मनोरंजन के प्रमुख साधन माने जाने वाले झूले अब आकर्षण कम और चिंता का कारण अधिक बनते जा रहे हैं।
झूलों की मनमानी से बिगड़ा मेले का माहौल
आमतौर पर किसी भी शहर या गांव का मेला आम लोगों के लिए खुशी और मनोरंजन का अवसर होता है। रतनपुर मेला भी इसी उम्मीद के साथ सजाया गया, लेकिन यहां लगे झूलों को लेकर संचालकों के गैर-जिम्मेदाराना रवैये, अवैध वसूली और बदसलूकी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि झूला ठेकेदार न सिर्फ मनमाने ढंग से शुल्क वसूल रहे हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों और पार्षदों के साथ भी गलत व्यवहार कर रहे हैं, जो चर्चा का विषय बना हुआ है।
सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी
मेले में लगे कई झूले कमजोर, जंग लगे लोहे पर टिके हुए हैं। न तो उनका कोई तकनीकी परीक्षण किया गया है और न ही सुरक्षा मानकों का पालन।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि झूलों के बीच में अचानक रुक जाने, संतुलन बिगड़ने या टूटने का डर हर समय बना रहता है। ऐसे में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जान जोखिम में पड़ रही है।

हादसों की आशंका, लेकिन लापरवाही जारी
मेले में झूला टूटने या तकनीकी खराबी के कारण लोगों के हवा में ही लटक जाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद इस बार भी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आ रही।
झूला चलाने वाले कई ऑपरेटर अनट्रेंड बताए जा रहे हैं, जिन्हें आपात स्थिति से निपटने का कोई अनुभव नहीं है।
मनमाना शुल्क और अवैध वसूली
झूलों के नाम पर अनुचित शुल्क वसूली भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।
जहां निर्धारित दर 30 रुपये होनी चाहिए, वहां 40 से 50 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
इतना ही नहीं, पार्किंग शुल्क भी तय दर से कई गुना ज्यादा लिया जा रहा है—10 रुपये की जगह 20 से 50 रुपये तक। इससे आम लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
बिना अनुमति के संचालन
सूत्रों के अनुसार, मेले में कई झूले बिना उचित अनुमति और कार्यादेश के ही संचालित किए जा रहे हैं। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर करता है।
पार्षद की अनदेखी, विरोध की तैयारी
इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू यह सामने आया
पार्षद के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और जानकारी देने से इनकार जैसे मामलों ने माहौल को और गरमा दिया है।
अब पार्षद की टीम ने निर्णय लिया है कि वे जल्द ही कलेक्टर और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर झूला ठेकेदारों की मनमानी, अवैध वसूली और सुरक्षा मापदंडों की जांच की मांग करेंगे।
सुझाव और समाधान
स्थानीय लोगों और पार्षदों ने प्रशासन से निम्न मांगें रखी हैं—
मेला शुरू होने से पहले और दौरान अनिवार्य सेफ्टी ऑडिट
हर झूले पर आधिकारिक रेट लिस्ट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना
सुरक्षा व शुल्क से जुड़ी शिकायतों के लिए हेल्प डेस्क या शिकायत केंद्र की स्थापना
बिना अनुमति चल रहे झूलों पर तत्काल कार्रवाई
ठोस कदम की दरकार
जैसे-जैसे मेले के दिन गुजरते जा रहे हैं, झूला ठेकेदारों की मनमानी बढ़ती जा रही है। यदि समय रहते ठोस और सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मेला किसी बड़े हादसे का गवाह भी बन सकता है।
अब देखना यह है कि प्रशासन आम जनता की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर कितनी गंभीरता दिखाता है।



