अमित दुबे की रिपोर्ट
मल्हार। धार्मिक नगरी मल्हार में राम नवमी का पर्व इस वर्ष भी पारंपरिक श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। सदियों से चली आ रही मान्यताओं और रीति-रिवाजों को संजोए हुए नगर में इस पावन अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
इस अवसर पर नगर की अधिष्ठात्री समलाई दाई एवं नगर देव ठाकुर-ठकुराईन की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है।
‘अठवाही रोठ’ परंपरा बनी आकर्षण का केंद्र
इस आयोजन का मुख्य आकर्षण ‘अठवाही रोठ’ चढ़ाने की परंपरा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। श्रद्धालु विशेष विधि से तैयार रोठ अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं। इसके साथ ही नींबू की प्रतीकात्मक बलि दी जाती है, जिसे गहरी आस्था और विश्वास के साथ निभाया जाता है। यह परंपरा मल्हार की विशिष्ट धार्मिक पहचान बन चुकी है।
तिवारी परिवार निभा रहा परंपरा का दायित्व
यह विशेष अनुष्ठान पंडित स्वर्गीय खुलूराम तिवारी के निवास स्थान पर संपन्न होगा। वर्तमान में इस स्थान की देखरेख और पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी पंडित गणेश तिवारी द्वारा निभाई जा रही है। तिवारी परिवार पीढ़ियों से इस परंपरा को संजोए हुए है और पूरे समर्पण के साथ इसे आगे बढ़ा रहा है।
संकट के समय की आस्था से जुड़ी परंपरा
मल्हार नगर में यह मान्यता रही है कि जब भी महामारी, प्राकृतिक आपदा या किसी प्रकार का संकट उत्पन्न होता था, तब समलाई दाई और नगर देवता को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती थी। पूर्व में इस अवसर पर पशु बलि की परंपरा भी प्रचलित थी, जो समय के साथ सामाजिक चेतना के कारण समाप्त हो गई।
1992 में हुआ ऐतिहासिक बदलाव
वर्ष 1992 में पंडित कमलाकांत तिवारी ने इस परंपरा में महत्वपूर्ण सुधार करते हुए पशु बलि की प्रथा को समाप्त कराया। इसके स्थान पर नींबू की प्रतीकात्मक बलि देने की शुरुआत की गई, जो आज भी श्रद्धा और परंपरा के साथ जारी है। यह बदलाव समाज में जागरूकता और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का केंद्र
तिवारी परिवार का निवास स्थान मल्हार में धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह स्थल न केवल पूजा-अर्चना का प्रमुख केंद्र है, बल्कि नगर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी है।
उल्लेखनीय है कि परिवार के सदस्य कृष्णकुमार तिवारी के प्रयासों से मल्हार क्षेत्र में महत्वपूर्ण पुरातात्विक अन्वेषण संभव हो सका। साथ ही, इस परिवार द्वारा मां डिडिनेश्वरी देवी की नियमित पूजा-अर्चना एवं मंदिर की देखरेख वर्षों से की जाती रही है। पंडित क्रांतिकुमार तिवारी ने भी जीवन पर्यंत माता की सेवा में अपना योगदान दिया।
समाज के सहयोग से हुआ मंदिर का जीर्णोद्धार
पंडित खुलूराम तिवारी ने केवट समाज के अनुरोध पर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। साथ ही मूर्ति का पंजीकरण भगवान श्रीराम के सहयोगी गुहा निषाद के नाम पर कराया गया, जो इस क्षेत्र की आस्था और इतिहास को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जाता है।
आस्था, परंपरा और एकता का संगम
राम नवमी पर आयोजित यह विशेष अनुष्ठान मल्हार नगर में आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। बदलते समय के साथ परंपराओं में सुधार के बावजूद उनकी मूल भावना को संजोकर रखना इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता है। यही कारण है कि हर वर्ष यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है और नगर की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखता है।



