पत्थलगांव।** जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के नाम पर हाल ही में दो दर्जन से अधिक नई एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। लेकिन इन दावों की कड़वी हकीकत आज उस वक्त सामने आई, जब एक सड़क हादसे में घायल दो सगे भाई-बहन शासन की ‘108’ सेवा की राह तकते रहे, मगर उन्हें मदद नहीं मिली।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आज सुबह ग्राम पंचायत बालाझर के एक भाई अपनी बहन के साथ स्कूटी पर सवार होकर काम के सिलसिले में पत्थलगांव जा रहे थे। ग्राम खरकट्टा के पास रास्ते में अचानक सड़क पर मवेशी के आ जाने से स्कूटी का संतुलन बिगड़ गया और दोनों सड़क किनारे गिरकर हादसे का शिकार हो गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों को गंभीर चोटें आईं और वे लहूलुहान होकर सड़क पर तड़पते रहे
दुर्घटना के बाद मौके पर मौजूद राहगीरों ने मानवता दिखाते हुए तुरंत **108 एम्बुलेंस** और अन्य सरकारी आपातकालीन नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने दर्जनों बार फोन लगाया, लेकिन या तो फोन लगा नहीं या फिर कोई उचित रिस्पॉन्स नहीं मिला।
> “दोनों भाई-बहन करीब **एक घंटे तक** दर्द से तड़पते रहे, लेकिन सिस्टम की सुस्ती के कारण एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। यह स्थिति तब है जब जिले को हाल ही में बड़ी संख्या में नई एम्बुलेंस दी गई हैं।” — एक स्थानीय नागरिक
### **परिजनों ने निजी वाहन से पहुंचाया अस्पताल**
जब सरकारी तंत्र से कोई मदद नहीं मिली, तो किसी तरह घायलों के परिजनों को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही परिजन अपने निजी वाहन के साथ मौके पर पहुंचे और तुरंत दोनों को पत्थलगांव के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां फिलहाल उनका उपचार जारी है।
इस घटना ने जिले के स्वास्थ्य विभाग और आपातकालीन सेवाओं पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं:
* अगर नई एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं, तो वे जरूरत के समय लोगों के काम क्यों नहीं आ रही हैं?
* आपातकालीन नंबरों पर संपर्क न हो पाना किसकी लापरवाही है?
* गोल्डन आवर (हादसे के बाद का पहला घंटा) में मदद न मिलना किसी की जान पर भी भारी पड़ सकता था, इसका जिम्मेदार कौन होगा?
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है और वे स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से इस लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।





