रतनपुर। प्राचीन नगरी रतनपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में उस समय गहरा शोक फैल गया, जब भयहरण हनुमान मंदिर एवं श्री सीताराम मंदिर के संस्थापक संत दया राम त्यागी जी के ब्रह्मलीन होने का समाचार प्राप्त हुआ। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। संत त्यागी जी ने अपना संपूर्ण जीवन भगवान श्रीराम एवं हनुमान जी की भक्ति, सनातन धर्म के प्रचार और मानव सेवा को समर्पित कर दिया था।
संत दया राम त्यागी जी मूलतः मध्य प्रदेश के निवासी थे। उनका प्रारंभिक नाम दशरथ तिवारी था।
वे शिक्षा विभाग में प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत रहे। सेवा निवृत्ति के पश्चात उनके मन में वैराग्य की भावना जागृत हुई और गुरु आदेशानुसार उन्होंने रामानंदी सम्प्रदाय में त्यागी सन्यासी के रूप में दीक्षा ग्रहण कर सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया।
कुछ समय तक रतनपुर में प्रवास करने के बाद वे रतनपुर-बेलगहना मार्ग पर लालपुर के आगे स्थित एक निर्जन स्थान पर पहुंचे। बताया जाता है कि वहां स्थित हनुमान जी की दिव्य प्रेरणा ने उन्हें उसी स्थान पर रुकने के लिए प्रेरित किया। उस समय वह क्षेत्र अत्यंत बीहड़ और सुनसान था, जहां लगभग पांच किलोमीटर तक कोई बस्ती नहीं थी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने दृढ़ संकल्प के साथ अपनी छोटी सी कुटिया बनाई और अकेले रहकर साधना प्रारंभ की।
धीरे-धीरे स्थानीय लोगों से उनका आत्मीय संबंध बना और उनके सहयोग, समर्थन एवं श्रद्धा से वहां भयहरण हनुमान मंदिर की स्थापना हुई। बाद में उसी परिसर में श्री सीताराम मंदिर एवं यज्ञशाला का भी निर्माण कराया गया। आज लगभग चार से पांच एकड़ में फैला यह आश्रम सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक साधना का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
आश्रम से रतनपुर, लालपुर, पोड़ी, शिवपुर, खैरा, चपोरा, फुलवारी पारा सहित दर्जनों गांवों के श्रद्धालु जुड़े हुए हैं।
संत त्यागी जी ने सदैव समाज में धर्म, सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया। उनके सान्निध्य में अनेक लोगों ने धार्मिक मार्ग अपनाया और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव किया।
संत दया राम त्यागी जी के ब्रह्मलीन होने की खबर से समूचे क्षेत्र में सन्नाटा और शोक का वातावरण व्याप्त है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने निर्जन भूमि को धार्मिक आस्था के विशाल केंद्र में परिवर्तित कर एक ऐसा आदर्श स्थापित किया है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। उनका जीवन त्याग, तपस्या और सेवा का अनुपम उदाहरण था।
उनके ब्रह्मलीन होने पर श्री मंगलागौरी मंदिर धाम, शंकराचार्य आश्रम पोड़ी रतनपुर तथा गोवर्धन मठ पुरी पीठ की ओर से गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए संत श्री को कोटि-कोटि प्रणाम अर्पित किए गए।
दैवज्ञ पंडित रमेश शर्मा, आचार्य एवं श्री महंत श्री मंगलागौरी मंदिर धाम ने कहा कि संत दया राम त्यागी जी का संपूर्ण जीवन सनातन धर्म की सेवा और ईश्वर भक्ति को समर्पित रहा। उनका आशीर्वाद और प्रेरणा सदैव श्रद्धालुओं के हृदय में जीवित रहेगी।



