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खाली पड़े मुख्य भवन में बन रहा मध्याह्न भोजन, रसोइयों पर मलबा गिरने का हमेशा बना रहता है डर,उसी रसोई घर में चल रही पहली से पांचवीं की क्लास, वही बन गया कार्यालय, स्टोर रूम और लाइब्रेरी,सड़क और नए भवन के लिए कई बार दी जा चुकी है लिखित अर्जी, 2 साल से नहीं हुई कोई सुनवाई
बुलंद टाइम्स न्यूज/गणेश यादव
तमता। पत्थलगांव विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत खरकट्टा के पंडरीपानी पारा में नौनिहालों का भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है। यहां का प्राथमिक शाला भवन और अतिरिक्त कक्ष पिछले कई सालों से इस कदर जर्जर हो चुका है कि वह कभी भी जमींदोज हो सकता है। छत से सीलिंग का मलबा गिरने और लगातार पानी रिसने के कारण बच्चों को तो वहां से हटा दिया गया है, लेकिन मजबूरी और संसाधनों की कमी के चलते पूरा स्कूल अब एक छोटे से रसोई घर में सिमट गया है।
हालत यह है कि एस्बेस्टस सीट वाले इसी छोटे से रसोई घर में पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इसी एक कमरे को स्कूल का कार्यालय (ऑफिस), स्टोर रूम और पुस्तकालय (लाइब्रेरी) भी बना दिया गया है। जगह बेहद कम होने के कारण कुछ बच्चों को मजबूरन बाहर बरामदे में बैठाया जाता है। आफत तब और बढ़ जाती है जब बारिश होती है। रसोई घर के आसपास खेत होने के कारण पानी सीधे दीवारों से रिसकर अंदर आ जाता है और कमरा तालाब में तब्दील हो जाता है। ऐसी स्थिति में स्कूल के कर्मचारी बाल्टी और अन्य बर्तनों से पानी भरकर बाहर फेंकते हैं।

एक तरफ जहां बच्चे इस तंग कमरे में पढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हादसे का बड़ा खतरा रसोइयों पर मंडरा रहा है। मध्याह्न भोजन बनाने के लिए रसोइयों को उसी जर्जर और खाली कराए जा चुके मुख्य भवन के हिस्से का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जहां हमेशा डर बना रहता है कि खाना बनाते समय उनके ऊपर भारी-भरकम मलबा न गिर जाए। वहीं, जिस रसोई घर में बच्चे बैठते हैं, वह भी सुरक्षित नहीं है; तेज बारिश और आंधी के दिनों में उसकी एस्बेस्टस सीट उड़ने और कोई अनहोनी होने का डर सताता रहता है।
स्कूल की प्रधान पाठक श्रीमती धनमति देवी पोर्ते ने बताया कि स्कूल में 23 बच्चे दर्ज हैं। मुख्य भवन की बदहाली को देखते हुए शिक्षा विभाग को पिछले 2 साल से लगातार लिखित में मरम्मत और नए भवन के निर्माण की सूचना दी जा रही है। यही नहीं, स्कूल तक पहुंच के लिए सड़क निर्माण को लेकर भी लिखित में आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन आज तक विभाग ने सुध नहीं ली।
इस स्कूल में बुनियादी सुविधाओं के नाम पर शून्य है। बिजली और सड़क की कोई व्यवस्था नहीं है। शौचालय तो बना है, लेकिन उसके दरवाजे पूरी तरह टूटे हुए हैं। पीने के पानी के लिए परिसर में लगा हैंडपंप सालों से सूखा पड़ा है। मध्याह्न भोजन बनाने और बच्चों के पीने के लिए पानी बगल के एक ग्रामीण के निजी बोरवेल से लाना पड़ता है।
स्थानीय सरपंच इसू दास किंडो ने बताया कि पंचायत स्तर से नए भवन और सड़क का प्रस्ताव बनाकर शिक्षा विभाग को कई बार भेजा जा चुका है। स्कूल स्टाफ और ग्रामीणों ने भी अपने स्तर पर कई आवेदन दिए हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। व्यवस्था से नाराज अभिभावक अब बच्चों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित और आक्रोशित हैं। ऐसे विपरीत हालातों में ये मासूम बच्चे अपना भविष्य कैसे गढ़ेंगे, यह प्रशासन के लिए एक बड़ा सवाल है।
शिक्षा विभाग का पक्ष: पत्थलगांव के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) वेदानंद आर्य ने इस मामले पर बात करते हुए कहा कि उन्हें पहले इस स्थिति की विस्तृत जानकारी नहीं थी। हालांकि, मामला संज्ञान में आने के बाद उन्होंने आश्वासन दिया है कि वह इस संबंध में जल्द ही बात करेंगे और उचित कदम उठाएंगे।



