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बुलंद टाइम्स न्यूज/अमित दुबे
बिलासपुर। बिलासपुर जिले के बेलगहना तहसील अंतर्गत बहेरामुड़ा–कुरदर क्षेत्र से सामने आए एक कथित फर्जी रजिस्ट्री मामले ने राजस्व एवं पंजीयन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि वर्षों पहले दिवंगत हो चुके एक आदिवासी बैगा व्यक्ति को सरकारी दस्तावेजों में जीवित दर्शाकर उसकी जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई।
यदि यह आरोप जांच में सही साबित होता है, तो मामला केवल एक भूमि विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी अभिलेखों की विश्वसनीयता, दस्तावेजों के सत्यापन और पंजीयन प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं का गंभीर उदाहरण माना जाएगा। स्थानीय स्तर पर इस प्रकरण को लेकर जमीन कारोबार से जुड़े लोगों, राजस्व अमले और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब संबंधित व्यक्ति का वर्षों पहले निधन हो चुका था, तब रजिस्ट्री के दौरान उसकी पहचान का सत्यापन किस प्रकार किया गया? किन दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन की प्रक्रिया पूरी हुई और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आवश्यक जांच-पड़ताल क्यों नहीं की गई? यदि किसी ने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया, तो वह सरकारी जांच में कैसे नहीं पकड़ा गया,?

ग्रामीणों और क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि मृत व्यक्ति के नाम पर भी जमीन की खरीद-फरोख्त संभव हो रही है, तो यह आम लोगों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उनका मानना है कि ऐसे मामलों से सरकारी रिकॉर्ड और राजस्व व्यवस्था पर लोगों का विश्वास प्रभावित होता है।
क्षेत्रवासियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों की जिम्मेदारी तय करने तथा यदि रजिस्ट्री में किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो उसे निरस्त कर संबंधित सरकारी अभिलेखों में आवश्यक सुधार करने की मांग की है।
नोट: यह समाचार सामने आए आरोपों और स्थानीय स्तर पर उठ रही मांगों पर आधारित है। मामले की आधिकारिक जांच और सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट आने के बाद ही तथ्यों की अंतिम पुष्टि हो सकेगी।



