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चालक की सूझबूझ से बची दर्जनों यात्रियों की जान, जर्जर पुल की अनदेखी पर उठे सवाल
बुलंद टाइम्स न्यूज/अमित दुबे
बिलासपुर। जिले के कोटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बांसा झाल के समीप रतनपुर-पेंड्रा राष्ट्रीय राजमार्ग पर रविवार दोपहर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। पेंड्रा से बिलासपुर की ओर जा रही पुखराज ट्रेवल्स की यात्री बस पुल का एक हिस्सा अचानक धंस जाने से बीच पुल पर ही फंस गई। चालक की सूझबूझ और त्वरित निर्णय से बस समय रहते रोक दी गई, जिससे बस में सवार सभी यात्रियों की जान सुरक्षित बच गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस जैसे ही पुल पर पहुंची, उसी समय अचानक तेज आवाज के साथ पुल में दरार पड़ गई और उसका एक हिस्सा नीचे धंस गया। चालक ने खतरे को भांपते हुए तत्काल ब्रेक लगा दिए। यदि बस कुछ फीट और आगे बढ़ जाती तो बस के पुल से नीचे गिरने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता था।
यात्रियों में मची अफरा-तफरी, ग्रामीण बने देवदूत…
घटना के तुरंत बाद बस में सवार यात्रियों में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए बस में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। राहत की बात यह रही कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस घटना में कोई भी यात्री घायल या हताहत नहीं हुआ।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर घंटों बाधित रहा यातायात, पुल धंसने के बाद
रतनपुर-कोटा-पेंड्रा राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। सड़क के दोनों ओर छोटे-बड़े वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यात्रियों और वाहन चालकों को घंटों तक परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा।
जर्जर पुल की अनदेखी पर ग्रामीणों का आक्रोश…
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। ग्रामीणों का कहना है कि पुल लंबे समय से जर्जर स्थिति में था और इसमें पहले से दरारें दिखाई दे रही थीं, लेकिन समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई। उनका आरोप है कि यदि नियमित निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत की गई होती तो इस तरह की नौबत नहीं आती।
प्रशासन को दी गई सूचना, मरम्मत की मांग तेज
घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित विभाग और प्रशासन को सूचना दे दी गई। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण किए जाने की तैयारी की गई। वहीं ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पुल की तत्काल मरम्मत, वैकल्पिक यातायात व्यवस्था तथा पूरे मार्ग के पुलों का तकनीकी परीक्षण कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
बड़ा सवाल—कब जागेगा जिम्मेदार विभाग?
राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर पुल का इस तरह धंस जाना निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सौभाग्य से इस बार चालक की सूझबूझ और ग्रामीणों की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन यदि समय रहते जर्जर पुलों की जांच और मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में इससे भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
फिलहाल प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करने की अपील की है, जबकि स्थानीय नागरिक पुल की शीघ्र मरम्मत और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।




