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बुलंद टाइम्स न्यूज, पत्थलगांव। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का गृह ज़िला जशपुर इन दिनों विकास की ऐसी ‘उर्वरक’ बयार महसूस कर रहा है कि पत्थलगांव के खाद व्यापारी खुशी से फूले नहीं समा रहे! खाद की कालाबाजारी को लेकर पत्थलगांव में यह दूसरा बड़ा धमाका हुआ है। ऐसा लगता है कि सरकार बदलने के बाद सबसे ज़्यादा ‘विकास’ पत्थलगांव के खाद-बीज विक्रेताओं की तिजोरियों और स्थानीय अधिकारियों की निष्ठा में हुआ है!
‘चूना लगाने’ की लाइव वर्कशॉप: अन्नपूर्णा खाद भंडार – दुकान में बैठकर मुस्कुराते हुए व्यापारी महोदय का अंदाज़ किसी अंतरराष्ट्रीय बिजनेस गुरु से कम नहीं है। कैमरे में साफ रिकॉर्ड हो रहा है – “सामने वाला जितने में चूतिया बन जाए, उतना वसूल लो”!
* MRP का नया फॉर्मूला: ₹266.50 का माल ₹350 बताकर बेचो या ₹550 ऐंठ लो। व्यापारी का गणित इतना मजबूत है कि अल्बर्ट आइंस्टीन भी कब्र में बैठकर नोट्स बना रहे होंगे!
* डिजिटल इंडिया का असली उपयोग: झकड़पुर के नंदू जैसे गरीब किसान आते हैं, ऑनलाइन पेमेंट (PayTM/PhonePe) भी करते हैं, लेकिन पक्की रसीद मांगने पर व्यापारी को अचानक ‘भूलने की बीमारी’ हो जाती है।
* अंगूठा सरकार का, जेब व्यापारी की: पॉस (POS) मशीन पर किसान का अंगूठा तो लग जाता है, पर खाद की बोरी के साथ किसान का पूरा बजट ही स्वाहा हो जाता है।
अधिकारियों की भक्ति : ‘व्यापारी शरणं गच्छामि’ – कृषि विभाग के अधिकारी इतने ‘ईमानदार’ और ‘वफादार’ हो चुके हैं कि उन्हें दुकानों पर सब कुछ ‘सब चंगा सी’ नज़र आता है। ऐसा लगता है कि अधिकारियों को खाद नहीं, बल्कि व्यापारियों के प्रेम का विशेष ‘टॉनिक’ पिलाया जा रहा है! मुख्यमंत्री के अपने गृह ज़िले में उड़नदस्ते शायद इतने उड़ चुके हैं कि ज़मीन पर क्या लूट मच रही है, यह देखने की फुर्सत किसी को नहीं है।
जब मुख्यमंत्री के अपने गढ़ में ही व्यापारी यह साबित करने पर तुले हैं कि “राजा कोई भी हो, हुकूमत तो हमारी ही चलेगी,” तो आम जनता सिर्फ एक ही सवाल पूछ रही है—साहब, यह अधिकारियों की चाटुकारिता का असर है या सत्ता के संरक्षण की मलाई?
किसान खेतों में खाद डालने गया था, पर पत्थलगांव के बाजार ने किसान का ही ‘खाद’ बना दिया!




