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बुलंद टाइम्स न्यूज/उपेंद्र ठाकुर
नवरंगपुर। ग्रामीण इलाकों में बिजली विभाग की लापरवाही किस कदर चरम पर है और यह लोगों की जान पर कितनी भारी पड़ सकती है, इसका जीता-जागता और हैरान करने वाला उदाहरण नवरंगपुर जिले के रायघर ब्लॉक अंतर्गत आने वाले हाटभारवन सोनारपारा गांव में देखने को मिल रहा है। यहाँ बिजली व्यवस्था पूरी तरह से भगवान भरोसे और ‘खतरनाक जुगाड़’ पर चल रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं।
खेतों के बीच लकड़ी के ‘रूख’ (सहारे) पर टिकी है बिजली की लाइन हाटभारवन सोनारपारा के खेतों के बीच से गुजरने वाली बिजली लाइन का खंभा इस कदर झुक चुका है कि वह कभी भी गिर सकता है। विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि इस जानलेवा खंभे को ठीक करने के बजाय, इसे एक लकड़ी के रुख (सहारे) के भरोसे छोड़ दिया गया है। खेत में काम करने वाले किसानों और मजदूरों के सिर पर हर वक्त मौत का साया मंडरा रहा है। थोड़ी सी भी तेज हवा या बारिश होने पर यह लकड़ी का सहारा हटा, तो बड़ा करंट फैल सकता है और कई जानें जा सकती हैं।
सड़क किनारे झुके खंभे दे रहे हैं बड़े हादसे को दावत
खेतों के अलावा, गांव के मुख्य सड़क के किनारे स्थित बिजली के खंभे भी खतरनाक तरीके से नीचे की ओर झुक चुके हैं। खंभों के झुकने के कारण हाई-टेंशन और एलटी लाइन के तार सड़क पर बेहद नीचे तक लटक रहे हैं। इस मुख्य मार्ग से रोजाना छोटे-छोटे स्कूली बच्चे, राहगीर, ग्रामीण और भारी वाहन गुजरते हैं। किसी बड़े वाहन के तार से छू जाने या खंभा अचानक ढह जाने का डर चौबीसों घंटे बना रहता है।
ग्रामीणों की खामोशी का फायदा उठा रहा विभाग?
हैरानी की बात यह है कि गांव के सीधे-साधे ग्रामीण जागरूकता के अभाव या विभागीय दफ्तरों के चक्कर काटने के डर से अब तक इसकी कोई औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं करा पाए हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बिजली विभाग के अधिकारियों और क्षेत्र के लाइनमैन को खेतों में लगा यह लकड़ी का जुगाड़ और सड़क किनारे झुके खंभे नजर नहीं आते? क्या सरकारी तंत्र को किसी बड़े हादसे या किसी बेकसूर की जान जाने के बाद ही सुध आएगी?
कार्रवाई का इंतजार
इस गंभीर और संवेदनशील मामले को लेकर अब देखना यह होगा कि इस खबर के प्रकाशन के बाद नवरंगपुर का बिजली विभाग जागता है या हाटभारवन सोनारपारा के ग्रामीण ऐसे ही डर के साए में जीने को मजबूर रहेंगे।




