ए आर कर्मा
रिपोर्टर, बस्तर संभाग हेड ✍️
जगदलपुर, बस्तर। बहुजन नायक एवं सामाजिक परिवर्तन के विचारक मान्यवर साहब कांशीराम जी के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर जगदलपुर में भीम आर्मी भारत एकता मिशन, जिला बस्तर की ओर से संकल्प रैली का आयोजन किया गया। रैली के माध्यम से झीरम घाटी घटना से जुड़े मामले में 10 आदिवासी व्यक्तियों को न्याय दिलाने सहित विभिन्न मुद्दों को उठाया गया। इस दौरान महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम सात सूत्रीय माँगों का ज्ञापन सौंपकर मामले में निष्पक्ष जाँच, न्यायसंगत कानूनी प्रक्रिया और आदिवासी बंदियों के मामलों की समीक्षा की माँग की गई।
रैली में भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश आजाद, प्रदेश उपाध्यक्ष सुयाल नाग सहित बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से आए जिला अध्यक्षों, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय, समानता, मानवाधिकारों तथा संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा का संदेश दिया गया।
कांशीराम साहब के विचारों को याद कर लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान मान्यवर कांशीराम साहब के सामाजिक परिवर्तन, समानता और बहुजन समाज के अधिकारों से जुड़े विचारों को याद किया गया। वक्ताओं ने न्याय और संवैधानिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। संकल्प रैली के माध्यम से बस्तर क्षेत्र में न्याय, शांति और संवाद को मजबूत करने की माँग सामने रखी गई।
सात सूत्रीय माँगों के माध्यम से उठाए प्रमुख मुद्दे
भीम आर्मी भारत एकता मिशन की ओर से राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में सात प्रमुख माँगें रखी गईं।
पहली माँग: संबंधित 10 आदिवासी व्यक्तियों की फाँसी पर तत्काल रोक लगाने तथा मामले में न्यायसंगत कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की माँग की गई।
दूसरी माँग: आत्मसमर्पण कर चुके प्रमुख आरोपियों की भूमिका की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जाँच कराने की माँग रखी गई।
तीसरी माँग: झीरम घाटी घटना से जुड़े कथित षड्यंत्र और अन्य पहलुओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की गई।
चौथी माँग: संबंधित मामले में दी गई सजा और न्यायिक प्रक्रिया की विधिसम्मत उच्चस्तरीय समीक्षा कराने की माँग उठाई गई।
पाँचवीं माँग: बस्तर की जेलों में बंद विचाराधीन आदिवासी बंदियों के मामलों की समयबद्ध समीक्षा कर पात्र बंदियों को कानून के अनुसार राहत देने की माँग की गई।
छठवीं माँग: एमबीएम से जुड़े बंदियों के मामलों की शीघ्र एवं निष्पक्ष समीक्षा कर कानूनी प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करने की माँग रखी गई।
सातवीं माँग: बस्तर में शांति स्थापित करने के लिए न्याय, संवाद, मानवाधिकार और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित नीति अपनाने की माँग की गई।
न्याय, शांति और संवैधानिक अधिकारों का संदेश
रैली के माध्यम से आयोजकों ने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को न्याय पाने का अधिकार है। आदिवासी समुदाय से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जाँच, पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण आवश्यक है। आयोजकों ने लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर न्याय की माँग को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संदेश था कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता तथा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रयास जारी रहने चाहिए।




