ए आर कर्मा
बस्तर संभाग हेड
बड़े बचेली, जिला दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़)।
दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला बड़े बचेली स्थित फुटबॉल ग्राउंड में दशहरा पर्व के अवसर पर रावण दहन का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के हजारों लोग रावण दहन का दृश्य देखने के लिए एकत्रित हुए। पूरे आयोजन के दौरान उत्साह, उमंग और उल्लास का माहौल देखने को मिला। दशहरा पर्व ने एक बार फिर क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
बड़े बचेली के फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित इस कार्यक्रम को देखने के लिए बच्चे, युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और आसपास के क्षेत्रों से आए लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। रावण दहन का दृश्य देखने के लिए लोगों में विशेष उत्सुकता दिखाई दी। मैदान में एकत्रित जनसमूह के बीच दशहरा पर्व को लेकर खास उत्साह नजर आया। यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक सहभागिता का महत्वपूर्ण अवसर बना।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहरा
दशहरा पर्व भारतीय संस्कृति में बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म और न्याय की स्थापना की थी। इसी परंपरा को याद करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन किया जाता है।
बड़े बचेली में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम ने भी लोगों को सत्य, न्याय, सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश दिया। दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक विचारों और अच्छे आचरण की प्रेरणा देने वाला अवसर भी है।
छत्तीसगढ़ी संस्कृति और गोंडी भाषा की पहचान को मिले सम्मान
बस्तर संभाग अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं, प्राकृतिक विरासत और विविध भाषाओं के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां छत्तीसगढ़ी भाषा के साथ-साथ गोंडी भाषा भी लोगों की सांस्कृतिक पहचान और परंपरागत जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ऐसे आयोजनों में स्थानीय भाषा, लोकगीत, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को स्थान मिलना क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छत्तीसगढ़ी और गोंडी भाषा में सांस्कृतिक संदेशों का प्रसार नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और मातृभाषा से जोड़ने का माध्यम बन सकता है।
बस्तर की वास्तविक सुंदरता यहां की विविध संस्कृति, स्थानीय परंपराओं और लोगों के आपसी सहयोग में दिखाई देती है। त्योहारों के अवसर पर अलग-अलग समुदायों के लोगों का एक साथ शामिल होना सामाजिक सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।
हजारों लोगों की सहभागिता से उत्सव का माहौल हुआ आकर्षक
बड़े बचेली के फुटबॉल ग्राउंड में रावण दहन देखने के लिए उमड़ी भीड़ ने दशहरा पर्व के प्रति लोगों के उत्साह को प्रदर्शित किया। परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने इस आयोजन में भाग लेकर पर्व की खुशियां साझा कीं। क्षेत्र में इस प्रकार के सार्वजनिक सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों को एक मंच पर लाने और सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
दशहरा जैसे पर्व हमें यह भी याद दिलाते हैं कि समाज में शांति, समानता, सद्भाव और आपसी सम्मान को प्राथमिकता देना आवश्यक है। हमारी संस्कृति तभी और अधिक समृद्ध बनेगी, जब हम अपनी परंपराओं को सम्मान देने के साथ-साथ दूसरी संस्कृतियों और भाषाओं का भी आदर करेंगे।
संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाने की जरूरत
बस्तर क्षेत्र में आयोजित होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थानीय समाज की पहचान को सामने लाने का अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजनों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी, पारंपरिक कला को प्रोत्साहन तथा छत्तीसगढ़ी और गोंडी भाषा के संरक्षण पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
विशेषकर नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, लोककला, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इससे स्थानीय संस्कृति को पहचान मिलेगी और आने वाली पीढ़ियां अपनी परंपराओं को गर्व के साथ आगे बढ़ा सकेंगी।
बैलाडीला बड़े बचेली के फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित दशहरा उत्सव ने क्षेत्र में पर्व की खुशियों और सांस्कृतिक जुड़ाव की सुंदर तस्वीर प्रस्तुत की। हजारों लोगों की उपस्थिति के बीच संपन्न हुआ रावण दहन कार्यक्रम लोगों के लिए उत्साह और उल्लास का अवसर बना।
संदेश: दशहरा हमें सिखाता है कि सत्य, न्याय, सद्भाव और मानवता के मार्ग पर चलकर ही एक बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है। बस्तर की संस्कृति, छत्तीसगढ़ी भाषा और गोंडी भाषा का सम्मान करते हुए सामाजिक एकता को मजबूत बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।




