रिपोर्ट – योगेश्वर साहू, पाण्डुका (गरियाबंद)
पाण्डुका। आज 24 अक्टूबर को पूरे विश्व में विश्व पोलियो दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को पोलियो जैसी घातक बीमारी के प्रति जागरूक करना और इसके उन्मूलन के लिए संकल्प लेना है।
क्या है पोलियो?
पोलियो एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अपना शिकार बनाती है। यह पोलियो वायरस के कारण फैलती है, जो संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह वायरस तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है और कुछ ही घंटों में बच्चे को आजीवन अपंग बना सकता है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, केवल टीकाकरण ही इससे बचाव है।
क्यों मनाया जाता है यह दिवस?
यह दिवस पोलियो वैक्सीन के आविष्कारक डॉ. जोनास साल्क के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। रोटरी इंटरनेशनल ने सबसे पहले इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी, ताकि दुनिया को पोलियो मुक्त बनाया जा सके।
भारत की बड़ी जीत:
भारत ने 2014 में पोलियो मुक्त देश का दर्जा हासिल किया था। आखिरी पोलियो केस 2011 में हावड़ा, पश्चिम बंगाल में मिला था। यह सफलता पल्स पोलियो अभियान और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत का नतीजा है।
आज भी क्यों जरूरी है सतर्कता?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देशों में आज भी पोलियो के मामले मिल रहे हैं। इसलिए भारत में भी हर बच्चे को 0 से 5 साल तक पोलियो की अतिरिक्त खुराक पिलाना अनिवार्य है।
स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि अपने बच्चे को पोलियो की दो बूंद जरूर पिलाएं और देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने में सहयोग दें।




