अमित दुबे की रिपोर्ट :-
नवरात्र के अंतिम दिन वही हुआ जिसका अंदेशा लोग पहले से ही कर रहे थे, कछुआ प्रकरण के तीन प्रमुख संदिग्ध भूमिगत हो गए , वन विभाग नें तलाश शुरू की !

25 मार्च को महामाया कुंड मेँ मिले 23 मृत कछुआ प्रकरण मेँ जांच आगे बढ़ रहा था इसी बीच नवरात्र पर्व शुरू हो गया और 1 अप्रेल से 9 अप्रेल तक इस प्रकरण के मुख्य जाँच अधिकारी की दस दिवस के लिए अन्यत्र विभागीय सेवा मेँ संलग्न कर दिया गया , सूत्र बताते हैँ कि वन विभाग के आला अधिकारियों पर नवरात्र तक खामोश रहने का ऊपरी दबाव था।
नगर मेँ इस बात की चर्चा जोरो पर थी कि जाँच अधिकारी को दस दिन के लिए जाँच से तटस्थ रखना एक सोची समझी रियायत का हिस्सा थी, जिसकी परिणीति संदिग्धों के भूमिगत होने की ख़बर के रूप मेँ सामने आई है !
सनद रहे कि इसी बीच एक संदिग्ध नें जिला सत्र न्यायलय मेँ अग्रिम जमानत की अर्जी भी लगाई थी जो 4 अप्रेल को ख़ारिज हो गई थी, एक दूसरे संदिग्ध द्वारा अग्रिम जमानत की अर्जी लगा कर, सुनवाई के दिन (5 अप्रेल )को वापस ले लिया गया!
नगर इस घटना से भारी आहात है, इस प्रकरण मेँ वन विभाग के आला अधिकारियों की कार्यशैली संदिग्धों के साथ खड़ी दिख रही है !
माननीय हाई कोर्ट के सीधे संज्ञान के बावजूद इस प्रकरण में वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों की उदासीनता एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है!
रतनपुर के विभिन्न संगठनों मेँ इस घटना के विरोध मेँ मोर्चा खोलने और आंदोलन की तैयारी है !
जल्द ही दोषियों पर कार्यवाही नहीं होने से स्थिति विस्फोटक होने की आशंका है! अब इस केस पर वन विभाग को अपनी स्थिति स्पष्ट करने की दरकार है !



