अमित दुबे की रिपोर्ट ;-
रतनपुर | कोटा विकासखंड की ग्राम पंचायत चपोरा एक बार फिर विकास कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। सरकार जहां गांव-गांव विकास का दावा कर रही है, वहीं चपोरा के सूर्यवंशी मोहल्ला खुंटापारा में विकास की हकीकत अधूरे सामुदायिक भवनों के रूप में साफ नजर आ रही है। यहां बीते तीन वर्षों से दो सामुदायिक भवन अधूरे पड़े हैं, जो न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता बल्कि भ्रष्ट व्यवस्था की भी गवाही दे रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सामुदायिक भवन निर्माण कार्य कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गया। ठेकेदार और तत्कालीन पंचायत सचिव की मिलीभगत से काम शुरू तो हुआ, लेकिन जैसे ही भुगतान की राशि निकाली गई, निर्माण कार्य ठप हो गया। आज स्थिति यह है कि अधूरा ढांचा गांव के बीचोंबीच खड़ा होकर भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल बन चुका है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि लगातार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी केवल “जांच जारी है” का रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं। जनपद पंचायत कोटा के अधिकारियों की ओर से अब तक न तो कोई जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है और न ही दोषियों पर किसी तरह की कार्रवाई हुई है। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
अधूरे सामुदायिक भवनों के कारण सूर्यवंशी मोहल्ले के लोगों को बैठकों, सामाजिक आयोजनों और शासकीय योजनाओं की सभाएं खुले आसमान के नीचे या उधार के स्थानों पर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके मोहल्ले के हिस्से केवल उपेक्षा आती है, विकास नहीं।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि 11 अगस्त 2025 को उन्होंने बाकायदा कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक चुप्पी बनी हुई है। जब मामला कलेक्टर तक पहुंच चुका है, तो अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई—यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।
अब सूर्यवंशी मोहल्लेवासी एकजुट होकर मांग कर रहे हैं कि
सामुदायिक भवन निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,
दोषियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए,
और वर्षों से अधूरे पड़े सामुदायिक भवनों को तत्काल पूरा कराया जाए।
ग्रामीणों का सीधा और तीखा सवाल है—
“क्या गांव के विकास की कीमत सिर्फ कागज़ों और फाइलों तक ही सीमित रह गई है?”
यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो सकता है।



