अमित दुबे की रिपोर्ट :-
बिलासपुर/ मल्हार। छत्तीसगढ़ की प्राचीन, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों से समृद्ध नगरी मल्हार—जो ताम्रपाषाण काल से लेकर मध्यकालीन इतिहास की साक्षी रही है—आज एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार कारण गौरव नहीं बल्कि प्रशासनिक अव्यवस्था है। आगामी महाशिवरात्रि पर्व और मल्हार मेला शुरू होने में अब मात्र दस दिन शेष हैं, परंतु नगर पंचायत स्तर पर किसी भी प्रकार की ठोस तैयारी नजर नहीं आ रही है।
पातालेश्वर (केदारेश्वर), डिंडिनेश्वरी और देऊर मंदिर जैसे विश्वविख्यात प्राचीन धार्मिक स्थलों के कारण मल्हार देश-प्रदेश से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। ऐसे में मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि नगर की सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक गतिविधियों का बड़ा माध्यम होता है। बावजूद इसके, मेला स्थल और नगर क्षेत्र में स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, सड़क मरम्मत और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव दिखाई दे रहा है।
प्रशासनिक खींचतान बनी बड़ी बाधा
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पंचायत मल्हार में लंबे समय से प्रशासनिक असंतुलन बना हुआ है। सितंबर 2025 में नगर पंचायत अध्यक्ष और मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) के बीच हुए विवाद के वीडियो सामने आने के बाद से व्यवस्थाएं और अधिक प्रभावित हुई हैं। आंतरिक मतभेदों का सीधा असर अब जनहित से जुड़े कार्यों पर पड़ता दिखाई दे रहा है।
मेला स्थल पर हालात बदतर
मेला स्थल की स्थिति फिलहाल चिंताजनक बनी हुई है—
कहीं कीचड़ और जलभराव
कहीं साफ-सफाई का पूर्ण अभाव
रोशनी के खंभे निष्क्रिय
व्यापारियों के लिए स्थल चिन्हांकन और सुरक्षा इंतजाम शून्य
बेमौसम बारिश की स्थिति में हालात और भी बिगड़ सकते हैं, जिससे न केवल व्यापारियों को आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
नगर पंचायत की चुप्पी से जनता नाराज
नगर पंचायत की ओर से अब तक कोई स्पष्ट कार्ययोजना या सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। इस खामोशी ने आम जनता, स्थानीय व्यापारियों और धार्मिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाएं नहीं सुधारी गईं, तो मल्हार मेले की गरिमा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा दोनों पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।
तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि—
मेला स्थल का तत्काल निरीक्षण किया जाए
साफ-सफाई, मिट्टी भराव और जलनिकासी की व्यवस्था हो
प्रकाश, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं
सुरक्षा बलों की तैनाती और आपात व्यवस्थाओं की योजना बनाई जाए
समय रहते सुधार जरूरी
मल्हार जैसे ऐतिहासिक नगर में मेला केवल उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और आजीविका का केंद्र होता है। ऐसे में समय रहते अव्यवस्थाओं का निराकरण न किया गया, तो इसका सीधा असर श्रद्धालुओं की संख्या, स्थानीय व्यापार और नगर की प्रतिष्ठा पर पड़ेगा।
अब देखना यह है कि नगर पंचायत और प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हैं या फिर एक और आयोजन अव्यवस्था की भेंट चढ़ जाता है।



