अमित दुबे की रिपोर्ट
कोटा/बिलासपुर (छत्तीसगढ़)।
शासकीय राशि के गबन के एक बड़े मामले में कोटा पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। शिक्षा विभाग में पदस्थ एक कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि इस मामले का मुख्य आरोपी अब भी फरार है। पुलिस द्वारा उसकी तलाश लगातार जारी है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला प्रार्थी नरेंद्र प्रसाद मिश्रा की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में बताया गया कि शिक्षा विभाग में कार्यरत लेखपाल/सहायक ग्रेड-02 नवल सिंह पैकरा एवं कर्मचारी देवेंद्र कुमार पालके ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वेतन संबंधी अभिलेखों में कूट रचना की और शासकीय राशि का अवैध आहरण किया।
जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपियों ने सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच 25,04,422 रुपये तथा मार्च 2025 से नवंबर 2025 के बीच 4,57,800 रुपये, इस प्रकार कुल 29,62,222 रुपये की शासकीय राशि का गबन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना कोटा में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन में तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) और अनुविभागीय अधिकारी पुलिस कोटा नुपूर उपाध्याय के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी थी। साइबर सेल की सहायता से मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल के आधार पर लगातार दबिश दी जा रही थी।
इसी कड़ी में पुलिस को आरोपी देवेंद्र कुमार पालके की लोकेशन प्राप्त हुई, जिसके बाद टीम ने सुनियोजित तरीके से घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के पश्चात आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले का मुख्य आरोपी नवल सिंह पैकरा अभी भी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित कर संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि उसे भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इस पूरी कार्रवाई में निरीक्षक नरेश चौहान, प्रधान आरक्षक सत्य प्रकाश यादव तथा आरक्षक धर्मेंद्र साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस विभाग ने इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश बताया है।



