अमित दुबे की रिपोर्ट
रतनपुर। ऐतिहासिक नगरी रतनपुर के प्राचीन वैभव, सांस्कृतिक धरोहर और रहस्यमयी इतिहास को संजोने के उद्देश्य से भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम् पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सर्वसम्मति से एक विशेष समिति का गठन किया गया, जो क्षेत्र में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों, दस्तावेजों तथा लोक परंपराओं के संरक्षण और संकलन का कार्य करेगी।
बैठक में प्रसिद्ध लेखक एवं इतिहासकार बलराम पांडे को समिति का अध्यक्ष चुना गया। वहीं दिनेश पांडे को उपाध्यक्ष, होरीलाल गुप्ता को सचिव, सुखदेव कश्यप को सह-सचिव तथा इंजीनियर शिवमोहन बघेल को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अतिरिक्त कार्यकारिणी सदस्य के रूप में ओमप्रकाश दुबे, राजेंद्र मिश्रा, ओमप्रकाश कश्यप, गेंदराम कौशिक, राजेंद्र दुबे और श्रवण विश्वकर्मा का चयन किया गया।
नव निर्वाचित अध्यक्ष बलराम पांडे ने बताया कि यह समिति केवल पांडुलिपियों की खोज और संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रतनपुर क्षेत्र में प्रचलित लोककथाओं, किंवदंतियों और मौखिक इतिहास को भी व्यवस्थित रूप से संकलित करेगी। उनका कहना है कि रतनपुर का इतिहास केवल लिखित दस्तावेजों में ही नहीं, बल्कि लोकजीवन की परंपराओं और जनश्रुतियों में भी जीवित है, जिसे सहेजना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने आगे बताया कि इस प्रकार का प्रयास वर्ष 2006 में डॉ. विनय पाठक के नेतृत्व में भी किया गया था, जिसमें उल्लेखनीय सफलता मिली थी। उसी अनुभव को आधार बनाकर एक बार फिर इस अभियान को संगठित रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक प्राचीन सामग्री को खोजकर संरक्षित किया जा सके।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने इस पहल को रतनपुर की ऐतिहासिक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। समिति द्वारा शीघ्र ही क्षेत्र में सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ करने, जागरूकता अभियान चलाने और स्थानीय लोगों को इस कार्य से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल रतनपुर के गौरवशाली अतीत के अनछुए पहलुओं का खुलासा होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।




