बुलंद टाइम्स के लिए ब्यूरो चीफ अनीष मिश्रा की विशेष रिपोर्ट
वैश्विक स्तर पर उत्पन्न युद्ध जैसे हालात और ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते दबाव का असर अब छत्तीसगढ़ में भी साफ दिखाई देने लगा है। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में पिछले तीन दिनों से पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत बनी हुई है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि शहर के कई प्रमुख पेट्रोल पंपों पर अब “नो स्टॉक” के बोर्ड लग गए हैं, कहीं रस्सियां बांधकर प्रवेश बंद कर दिया गया है तो कहीं ताले लटकते नजर आ रहे हैं।
रायपुर के फफडीह , घड़ी चौक भनपुरी और जैस्तम्भ चौक जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कई पेट्रोल पंप सूने पड़े हैं। जहां दो दिन पहले तक सीमित मात्रा में पेट्रोल-डीजल दिया जा रहा था, वहीं अब कई पंपों पर ईंधन पूरी तरह समाप्त हो चुका है। जो पेट्रोल पंप खुले हुए हैं वहां सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। लोग कई-कई घंटे तक अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, उसके बाद भी सीमित मात्रा में ही पेट्रोल और डीजल दिया जा रहा है। कई स्थानों पर दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग लाइनें लगानी पड़ रही हैं।
स्थिति केवल रायपुर तक सीमित नहीं है। बिलासपुर, धमतरी, बस्तर, सरगुजा और कोंडागांव समेत कई जिलों से भी ईंधन संकट की खबरें सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों के लिए डीजल नहीं जुटा पा रहे हैं, जिससे खेती-किसानी पर भी असर पड़ने लगा है।
जानकारों के अनुसार वैश्विक ऊर्जा संकट, युद्ध की आशंका और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण तेल आपूर्ति बाधित हुई है। वहीं अफवाहों के चलते लोगों द्वारा अतिरिक्त स्टॉक जमा करने से स्थिति और बिगड़ गई है। पेट्रोलियम डीलर्स के मुताबिक अचानक मांग बढ़ने से उपलब्ध स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है।
प्रदेश सरकार और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि घबराहट में अतिरिक्त ईंधन संग्रह न करें और जरूरत अनुसार ही पेट्रोल-डीजल लें। कई जिलों में जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है।




