हाईकोर्ट ने माना मां वाग्देवी का मंदिर
बुलंद टाइम्स के लिए ब्यूरोचीफ अनीश मिश्रा की विशेष रिपोर्ट
मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक Bhojshala–कमाल मौला मस्जिद विवाद पर शुक्रवार को Madhya Pradesh High Court की इंदौर बेंच ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर माना है। इसके साथ ही वर्ष 2003 से लागू वह व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई, जिसमें हिंदू पक्ष को मंगलवार और मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार के दिन पूजा एवं नमाज की अनुमति दी गई थी।
करीब 512 वर्ष पुराने इस विवाद को लेकर लंबे समय से देशभर में बहस चल रही थी। हिंदू पक्ष का दावा रहा है कि भोजशाला मूल रूप से 11वीं शताब्दी में परमार वंश के महान शासक राजा भोज द्वारा स्थापित मां सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र था। कहा जाता है कि यहां देशभर से विद्यार्थी वेद, शास्त्र और संस्कृत की शिक्षा प्राप्त करने आते थे।
इतिहास से जुड़े दावों के अनुसार वर्ष 1305 में दिल्ली सल्तनत के शासक Alauddin Khalji की सेना ने मालवा क्षेत्र पर आक्रमण किया था। हिंदू संगठनों का कहना है कि उसी दौरान भोजशाला पर हमला किया गया और लगभग 1200 विद्यार्थियों तथा आचार्यों की हत्या कर दी गई। दावा किया जाता है कि उस समय शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों को भी नहीं बख्शा गया और परिसर को भारी नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद परिसर के एक हिस्से को मस्जिद के रूप में उपयोग किया जाने लगा। हालांकि इन दावों को लेकर इतिहासकारों में अलग-अलग मत भी मौजूद हैं।
यह विवाद वर्षों तक अदालतों में चला। वर्ष 2024 में अदालत के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा लगभग 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया गया। सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुरातात्विक प्रमाणों के आधार पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि परिसर का मूल स्वरूप मंदिर का था और यहां मां वाग्देवी की पूजा की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।
भोजशाला से जुड़ी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कड़ी मां सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा भी मानी जाती है। दावा किया जाता है कि ब्रिटिश शासनकाल के दौरान परिसर से मिली यह प्रतिमा अंग्रेज अधिकारी अपने साथ Britain ले गए थे। वर्षों से हिंदू संगठनों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा इस प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग की जाती रही है। उनका कहना है कि मां सरस्वती की प्रतिमा को पुनः भारत लाकर भोजशाला या किसी भव्य मंदिर में स्थापित किया जाना चाहिए।
फैसले के बाद धार सहित पूरे मध्य प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं मुस्लिम पक्ष ने संकेत दिए हैं कि वे इस निर्णय को Supreme Court of India में चुनौती दे सकते हैं।
भोजशाला का यह फैसला अब केवल मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।




