नवीन राजपूत
पीड़ित ने लोगों से की अपील किसी के बहकावे में न आवे.
गरियाबंद 20.06.26
कहते है अपराधकारक से अपराध को सह देने वाला अधिक गुनहगार होता है। एक ऐसा मामला जहां थाना फिंगेश्वर के जांच अधिकारी और थाना प्रभारी प्रकरण को शून्य करने में लगे है फिर भी उच्च अधिकारी पुलिस प्रसाशन के गैर जिम्मेदार रवैए पर मेहरबान है जिनसे इन पर सवालिया निशान लग गया है। मामला ग्राम फुलझर का है जहां पीड़ित को सार्वजनिक मंदिर निर्माण पर उसके काबिज जमीन पर असहमति जताते 30 के झुंड में लोगों को भड़काकर जानलेवा हमला करते मारपीट की। इतने गंभीर मामला होने के बावजूद पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई नहीं करना और उल्टे अपराधियों के साथ मिलकर तरह तरह के षडयंत्र करना रोजमर्रा की जिंदगी बन गई है। न्याय की अपेक्षा न होने से पीड़ित ने महामहिम राज्यपाल से गुहार लगाई है। माननीय पुलिस महानिदेशक रायपुर के पत्राचार पर पीड़ित परिवार को फर्जी SC/ST में कार्रवाई के विरुद्ध आवेदन पर आवेदक और गवाहों के बयान के महज एक दिन बाद पुलिस का प्राइवेट गाड़ी में सुबह 8 बजे ही अपराधियों के घर आना और अपराधियों का पुनः सरेआम जान से मारने की धमकी देना पूरे पुलिस प्रशासन पर आमलोगों को उंगली उठाने में मजबूर कर दिया है। फिरहाल पुलिस और अपराधियों में क्या खिचड़ी पक रही है वक्त ही बताएगा।
पीड़ित का कहना है हम सिर्फ शांति की बात करते है मगर सवाल यदि परिवार पर आती है और बार बार फर्जी केश में फंसाया जाता है तो कानूनी लड़ाई संवैधानिक तरीके से जारी रहेगा। उन्होंने ग्रामवासियों से अपील की है कि वह इस प्रकार के किसी पचड़े में न पड़े। सच और झूठ को समझने का प्रयास करें किसी के उकसावे में न आवे।
ऐसे ही घटनाएं कुछ साल पहले और घटित हो गई है जिसमें कई पीढ़ी से निवासरत डीहू राम साहू के मकान निर्माण पर रोक लगा दिया था जबकि वह उस जमीन पर उस समय से निवासरत था जिस समय बस्ती ही नहीं बसा था। उक्त जमीन को जबरन छुड़वाने संतु ध्रुव के द्वारा ही लोगों को भड़काया गया , लोगों से जबरन हस्ताक्षर करवाकर शांति भंग, बलात्कार, चोरी, छेड़छाड़, मारपीट,शराब आदि की झूठा मुकदमा दायर किया गया। कुछ समूह से भी श्री साहू को बेदखल कर दिया जिनसे पूरे गांव में अशांति छा गई। कुछ साल के कानूनी संघर्ष के बाद सभी मामला साहू के पक्ष में आ गया। विरोधी क्षमा याचना करने लगे जिसमें उन्होंने बलवा जैसे मामले में भी माननीय व्यवहार न्यायालय से समझौता कर लिया। शायद विभिन्न मामलों में हार की कसक ने संतु ध्रुव और उनके गुर्गों को अन्दर से जला रही है इसी कारण बेहतरीन कार्य का संचालन कर रहे ग्राम के मुखिया पर प्राघातक हमला कर दिया जिनकी मुखियागिरी की चर्चा आसपास के गांवों में भी है।
ग्राम का मुखिया बनते ही श्री साहू ने महिलाओं के साथ शराबबंदी की मुहिम चलाई जिससे शराब कोचिए और पीकर विवाद करने वाले असामाजिक तत्वों में कमी आई। शराबबंदी में अधिकतर महिलाएं आगे थी जिम्मेदारों को कोई मतलब ही नहीं था। सार्वजनिक स्थलों और शासकीय मकानों को भी व्यक्तिगत उपयोग पर अंकुश लगाया गया ताकि जरूरतमंदों को उपयोग के लिए दिया जा सके। सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने सिर्फ एक साल में हनुमान चालीसा, रामायण और त्रिदिवसीय महायज्ञ आदि में महती भूमिका निभाई फिर भी ग्राम पर आर्थिक बोझ पड़ने नहीं दिया जबकि ग्राम में दान अपेक्षा के अनुरूप ही नहीं आया।
श्री साहू बताते है एक वाकया ऐसा भी हुआ था जिनसे फिंगेश्वर पुलिस की जान हलक पर थी, ग्राम फुलझर के भुजिया परिवार ने अपने लाल बंगले को आग के हवाले कर दिया था। असहाय पुलिस ने श्री साहू और उनके टीम के कुशल नेतृत्व के सहारे ही समझौता कराने में सक्षम रहा और वहीं फिंगेश्वर पुलिस उल्टे श्री साहू को नोचने में लगे है।
उन्होंने सवाल दागते हुए कहा मेरी निजी जमीन पर ईर्ष्यावश रोक लगाकर लाखों खर्च करवाकर कर्ज में डाला था किंतु आज लोग सार्वजनिक स्थलों शासकीय भूमि को अवैद्य कब्जा कर क्षति पहुंचा रहे है क्यों ध्यान नहीं जाता। संतु खुद अपने गिरेबान में झांककर देखे किस प्रकार सार्वजनिक भूमि( रावणभाठा, सबसे पुराना हैंडपंप, स्कूल की जमीन आदि) को हड़प लिया और ग्रामीण चुप बैठे है। उन्होंने गांव के गोठान में भी अपने चमचों को अतिक्रमण करवा दिया। गलियों व सार्वजनिक भूमि का अस्तित्व संकट में है। इस पर क्यों बात नहीं करते। कभी शिक्षा, शराबबंदी पर बात ही नहीं किया। 10 मीटर में बच्चों को जहर बेच रहे हो कोई दूसरा होता तो दुकान बंद हो जाती।लोगों को डलहौजी की तरह आपस में लड़वाना और राज करना इनका काम बन गया है। लेकिन यह स्थायित्व नहीं है।
मामला यह भी सामने आ रही है कि ललेशरू ध्रुव और भूषण सेन को श्री साहू के जमीन पर बाउंड्री लगाने के लिए पुलिस ने ही बोला था। रिश्तेदारी का लाभ उठाकर किसी फिंगेश्वर पुलिस ने ही पीड़ित को एससी एसटी प्रकरण में फंसाने व्यापक प्रबंध किया गया ताकि श्री साहू व परिवार छः माह जेल में रहे और इधर मकान तैयार हो जाए। ज्यादती हुई तो साहू परिवार सीबीआई जांच की मांग की बात कही।
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