अमित दुबे की रिपोर्ट
रतनपुर। ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के लिए प्रसिद्ध गज किला रतनपुर स्थित प्राचीन तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) रायपुर मंडल द्वारा लगभग 2 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से कराए जा रहे सौंदर्यीकरण एवं पाथवे निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
स्थानीय सामाजिक संस्था मोरध्वज वेलफेयर फाउंडेशन ने आरोप लगाया है कि विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर प्राचीन तालाब के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की जा रही है।
संस्था का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान तालाब का क्षेत्रफल कम किया जा रहा है, जिससे इसकी ऐतिहासिक संरचना और प्राचीन पहचान प्रभावित हो रही है।
फाउंडेशन के पदाधिकारियों के अनुसार निर्माण एजेंसी द्वारा टेंडर की शर्तों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि जहां कार्य योजना में नए पिचिंग पत्थरों के उपयोग का प्रावधान है, वहीं मौके पर पुराने पत्थरों का पुनः उपयोग किया जा रहा है। इससे निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले को लेकर संस्था ने पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, रायपुर मंडल के अधीक्षक पुरातत्वविद डॉ. काली मिथू को लिखित शिकायत सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की थी।
संस्था का आरोप है कि शिकायत के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
विभागीय कार्रवाई नहीं होने पर मोरध्वज वेलफेयर फाउंडेशन ने अब इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक, नई दिल्ली को विस्तृत शिकायत भेजी है।
शिकायत में पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
फाउंडेशन का कहना है कि गज किला और उससे जुड़ा यह प्राचीन तालाब रतनपुर की ऐतिहासिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसके मूल स्वरूप को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कार्य क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।
अब लोगों की निगाहें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद विभाग मामले की जांच कर क्या कार्रवाई करता है और रतनपुर की इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।




