Oplus_131072
₹132 करोड़ की ‘लमती बैराज योजना’ का टेंडर हुआ रद्द, किसान कांग्रेस उपाध्यक्ष ने भाजपा सरकार से पूछा- “आखिर कब तक कागजों में बहती रहेगी विकास की गंगा?
बुलंद टाइम्स न्यूज़, खैरागढ़/गंडई। खैरागढ़ और राजनांदगांव जिले के हजारों किसानों के खेतों तक पानी पहुँचाने वाली ₹132 करोड़ की लमती फीडर बैराज योजना का टेंडर निरस्त होने और काम पूरी तरह बंद होने पर प्रदेश किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष रणजीत सिंह चंदेल ने गहरा दुख और आक्रोश जताया है। उन्होंने समाचार पत्र “पत्रिका” राजनांदगांव दिनांक 22 जुन 2026 (सोमवार) को छपी खबर का हवाला देते हुए भाजपा सरकार की नियत पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
रणजीत सिंह चंदेल ने सीधे शब्दों में कहा, “चुनाव के समय नेता जी कहते हैं कि हमारी सरकार गांव, गरीब और किसानों की सरकार है। लेकिन चुनाव खत्म होते ही किसान को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है। नौ महीने पहले बड़े ही गाजे-बाजे के साथ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी ने खैरागढ़ आकर इस योजना का नारियल फोड़ा था (भूमिपूजन किया था)। लेकिन आज अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदारों की आपसी लड़ाई के कारण टेंडर रद्द हो गया और पूरी योजना ठंडे बस्ते में चली गई।”
क्षेत्र के किसानों की सबसे बड़ी समस्या सूखा और पलायन…
रणजीत सिंह चंदेल ने इलाके की जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि हमारे खैरागढ़ और राजनांदगांव क्षेत्र में सिंचाई के साधनों की भारी कमी है। आज भी यहाँ का किसान पूरी तरह मानसून (बारिश) के भरोसे बैठा रहता है। अगर समय पर बारिश न हो, तो फसलें सूख जाती हैं, लागत डूब जाती है और किसान कर्ज के दलदल में धंस जाता है। खेतों में पानी न होने के कारण यहाँ के गरीब किसानों और मजदूरों को अपने बूढ़े मां-बाप और बच्चों को छोड़कर मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में पलायन (परदेस कमाने) जाना पड़ता है। यह इस क्षेत्र का सबसे बड़ा दर्द है।
बैराज बनने से किसानों को क्या होता ‘बड़ा लाभ’?
रणजीत सिंह चंदेल ने समझाया कि अगर यह लम्ती बैराज समय पर बन जाता, तो हमारे क्षेत्र की पूरी तस्वीर बदल जाती:
28 गांवों की 977 हेक्टेयर जमीन होगी हरी-भरी हमारे केसीजी जिले के ग्राम भंडारपुर, मुढ़ीपार, जगरनाथपुर, इसी तरह राजनांदगांव जिले के बिजनापुर मुड़िया तेंदू भाटा बसंतपुर केसली चेतू खत्री मां की कुरमुरी पुरैना कोलियापुरी जराही ठेकावा शिवानीकला, मोहरा सहसपुर सलटिकरी अनिया रुवाताला नवागांव पेंडरी खुडमुडी बिल्हारी, कोलिहापुरी केसली बम्हनी धनगांव सुकुलदैहान,टिकरापारा टोला जैसे 28 गांवों की करीब 2500 एकड़ (977 हेक्टेयर) सूखी जमीन को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलता।
साल में दो बार लहलहाती फसलें: पानी मिलने से किसान सिर्फ धान के भरोसे नहीं रहता, वह रबी की फसल (गेहूं, चना, सब्जियां) भी उगा पाता। *साल में दो फसलें होने से किसान भाई की आमदनी दोगुनी हो जाती*।

मवेशियों और पीने के पानी की समस्या होती दूर बैराज में करीब 9 एमसीएम पानी जमा रहता, जिससे पूरे इलाके का वाटर लेवल (भूजल स्तर) ऊपर आ जाता। कुएं-नल सब रिचार्ज हो जाते और गर्मी के दिनों में मवेशियों (गाय-बैलों) को पीने के पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता।
टेंडर रद्द होने और बैराज न बनने से क्या होगी ‘बड़ी हानि’?
रणजीत सिंह चंदेल ने सरकार को सचेत करते हुए बताया कि इस योजना के अटकने से क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा:
लागत में भारी बढ़ोतरी (महंगाई की मार): महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा से लगी इस योजना की लागत पहले ₹137 करोड़ के आसपास थी। अब काम जितना लेट होगा, सीमेंट, छड़ और मजदूरी के दाम उतने ही बढ़ेंगे। यानी जनता के टैक्स का पैसा और ज्यादा बर्बाद होगा।
पीढ़ियों का नुकसान: इस टेंडर के रद्द होने से अब दोबारा नई निविदा निकलेगी, फिर ठेकेदार तय होगा, फिर विवाद होगा। इस सरकारी लेत-लतीफी के चक्कर में किसानों की एक और पूरी पीढ़ी पानी के बिना तरसती रह जाएगी।
बढ़ता कर्ज और मायूसी: पानी की उम्मीद में जो किसान इस साल बेहतर खेती का सपना देख रहे थे, उन्हें फिर से सूखे और नुकसान का सामना करना पड़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो जाएगी।
सरकार से सीधे सवाल और खुली चुनौती
रणजीत सिंह चंदेल ने सीधे शब्दों में सरकार से जवाब मांगा है:
आखिर कृषि और किसानों से जुड़ी इतनी बड़ी और जीवनदायिनी योजना को लेकर अधिकारी इतने लापरवाह क्यों रहे कि मामला कोर्ट-कचहरी में फंस गया?
क्या भाजपा सरकार सिर्फ कागजों में और विज्ञापनों में ही किसानों को खुश रखना चाहती है, या धरातल पर भी कोई काम करने की इच्छा रखती है?
किसान कांग्रेस उपाध्यक्ष रणजीत सिंह चंदेल ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि किसान अब जाग चुका है। वह नेताओं के झूठे वादों और अधिकारियों की इस टेंडर-टेंडर के खेल को चुपचाप नहीं देखेगा। यदि सरकार ने तुरंत इस परियोजना की कमियों को दूर कर धरातल पर काम चालू नहीं करवाया, तो किसान कांग्रेस इन सभी 28 गांवों के गरीब और सीधे-साधे किसानों के साथ किसान कांग्रेस के पदाधिकारी गांव _गांव जाकर छत्तीसगढ़ में बैठी विष्णु देव साय की भाजपा सरकार के खिलाफ जनजागृति पैदाकर करेगी आने वाले समय के लिए भाजपा को किसान विरोधी चेहरा होने के लिए किसान कांग्रेस बीजेपी सरकार को बेनकाब करेगी!



