पूर्व मालगुजार व सरपंच संघ अध्यक्ष रणजीत सिंह चंदेल एवं पूर्व मंडी अध्यक्ष संजू सिंह चंदेल सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक रहे विशेष रूप से उपस्थित।
बुलंद टाइम्स न्यूज़, गंडई पंडरिया।
“मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना…” इस अमर संदेश को चरितार्थ करते हुए ग्राम कोंगिया कला छिराहीडीह में सदियों पुरानी साझी संस्कृति और अटूट सामाजिक समरसता की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। ग्राम में मोहर्रम का मुकद्दस त्यौहार हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के भाई-बहनों द्वारा पूरी अकीदत, अदब और आपसी सौहार्द के साथ मिलकर पारंपरिक ढंग से मनाया गया। यह भव्य आयोजन पूरे गंडई पंडरिया क्षेत्र में गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक अनुपम मिसाल बनकर उभरा है।

प्रतिष्ठित अतिथियों और गणमान्य नागरिकों की रही गरिमामयी उपस्थिति…
इस पावन और ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ग्राम के पूर्व मालगुजार परिवार के प्रतिष्ठित सदस्य एवं पुर ब्लॉक सरपंच संघ के अध्यक्ष श्री रणजीत सिंह चंदेल तथा पूर्व मंडी अध्यक्ष व ग्राम के वरिष्ठ प्रतिष्ठित नागरिक श्री संजू सिंह चंदेल विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने ग्रामीणों के साथ इस कौमी एकता के प्रतीक उत्सव में सहभागिता करते हुए क्षेत्र की सुख, समृद्धि और आपसी भाईचारे को अक्षुण्ण बनाए रखने की कामना की। इस दौरान ग्राम एवं क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक, प्रबुद्ध जन और जनप्रतिनिधि भी भारी संख्या में मौजूद रहे, जिनका ग्रामीणों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया।
आकर्षण का केंद्र रहा भव्य ताजिया और पारंपरिक मेला…
त्यौहार को लेकर गाँव में कई दिनों से उत्साह का माहौल था। गाँव के मुस्लिम भाइयों द्वारा दिन-रात कड़ी मेहनत कर बेहद आकर्षक, नक्काशीदार और भव्य ताजिया का निर्माण किया गया जैसा कि चित्र में जीवंत रूप से देखा जा सकता है)। ताजिया को उठाने और जुलूस को आगे बढ़ाने में गाँव के हिंदू और मुस्लिम दोनों वर्गों के युवाओं व बुजुर्गों ने कंधे से कंधा मिलाकर अपनी अटूट सहभागिता दर्ज की।
मोहर्रम के इस विशेष अवसर पर गाँव में एक पारंपरिक भव्य मेले का भी भव्य आयोजन हुआ जो चित्र में साफ़ नजर आ रहा है। मेले में भारी संख्या में ग्रामीण महिलाएँ, पुरुष और नन्हे-मुन्ने बच्चे शामिल हुए। तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन, चाट-पकौड़े, मिठाइयों की दुकानें और बच्चों के मनपसंद रंग-बिरंगे खिलौने इस मेले का मुख्य आकर्षण रहे।

इंसानियत और अटूट भाईचारे का संदेश…
कोंगिया कला छिराहीडीह की इस अनूठी और गौरवशाली परंपरा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मजहब चाहे कोई भी हो, आपसी प्यार, सौहार्द और इंसानियत से बढ़कर कुछ नहीं है। जुलूस और मेले के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में पूरे गाँव का सामूहिक व अनुशासित सहयोग सराहनीय रहा।
ग्राम प्रमुखों, अतिथियों और प्रबुद्ध जनों ने ईश्वर और अल्लाह से यही दुआ की कि गंडई पंडरिया क्षेत्र की यह साझी संस्कृति और कोंगिया कला छिराहीडीह का यह अटूट भाईचारा हमेशा इसी तरह कायम रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहे।



