बुलंद टाइम्स न्यूज, रायपुर। छत्तीसगढ़ की पावन धरा और लोक संस्कृति को वैश्विक मंच पर एक अद्वितीय पहचान दिलाने वाली सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का आज, 5 जुलाई 2026 को निधन हो गया है। उनके अवसान से कला, संस्कृति और संगीत जगत में एक अपूरणीय क्षति हुई है और पूरे देश सहित छत्तीसगढ़ राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है।
महाभारत की गाथा को जन-जन तक पहुँचाया…
8 अगस्त 1956 को जन्मीं तीजन बाई जी ने अपनी अनूठी और प्रखर शैली (कपालिक शैली) के माध्यम से महाभारत के प्रसंगों को जीवंत किया। अपनी बुलंद और जादुई आवाज़, भावपूर्ण गायन, और अद्भुत अभिनय क्षमता के बल पर उन्होंने पंडवानी जैसी क्षेत्रीय लोककला को सात समंदर पार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किया। तंबूरे को हाथ में थामकर जब वे मंच पर उतरती थीं, तो हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता था।
अभूतपूर्व उपलब्धियाँ और सम्मान…
भारतीय लोक कलाओं और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन में उनके बेमिसाल योगदान के लिए उन्हें देश के कई सर्वोच्च नागरिक और सांस्कृतिक सम्मानों से नवाजा गया, जो इस प्रकार हैं:
सम्मान/पुरस्कार – वर्ष 1988 पद्म श्री, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1992, पद्म भूषण 2003, छत्तीसगढ़ रत्न 2018, पद्म विभूषण 2019, कबीर सम्मान 2022
शोक संवेदनाएँ
उनकी सादगी, कला के प्रति समर्पण और उनकी मधुर स्मृतियाँ सदैव देशवासियों के दिलों में अमर रहेंगी। छत्तीसगढ़ की कला जगत के पुरोधा और बेमिसाल संवाहक “तीजन दीदी” को संपूर्ण राष्ट्र की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि।



