बुलंद टाइम्स न्यूज, रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। करीब एक घंटे के भाषण में उन्होंने 136 बिंदुओं के आरोप गिनाते हुए कहा कि ढाई साल में सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और ऐसा लगता है कि राज्य को कोई “अदृश्य शक्ति” चला रही है।
भूपेश बघेल ने कृषि, कानून-व्यवस्था, खाद संकट, धान खरीदी, तेंदूपत्ता, राशन वितरण, वित्तीय प्रबंधन, स्वास्थ्य और आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को समय पर यूरिया और डीएपी नहीं मिल रहा, धान खरीदी व्यवस्था चरमरा गई है और किसान महंगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से किसानों को प्रति बोरी सैकड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
कानून-व्यवस्था पर बघेल ने सीतापुर, बलौदाबाजार और अन्य घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अवैध खनन, नकली खाद, महादेव एप और जंगलों की कटाई जैसे मामलों में सरकार की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। तमनार और हसदेव क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप भी लगाया।
भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के विधायकों और मंत्रियों ने कई बार हस्तक्षेप किया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने खाद संकट के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसानों को भ्रमित किया जा रहा है। वहीं वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत बताते हुए कहा कि सरकार योजनाबद्ध तरीके से बजट चला रही है और जरूरत पड़ने पर ही अनुपूरक बजट लाया जाता है।
भूपेश बघेल ने अंत में कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था से लेकर किसानों और गरीबों से जुड़े मुद्दों तक सरकार पूरी तरह असफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता विरोधी फैसलों के कारण सरकार नैतिक आधार खो चुकी है और उसे सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है। सत्ता पक्ष ने हालांकि सभी आरोपों को निराधार बताते हुए सरकार के कामकाज का बचाव किया।



