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बुलंद टाइम्स न्यूज/योगेश्वर साहू
रायपुर। कटोरा तालाब स्थित बापू की कुटिया में माहौल पूरी तरह रफीमय हो गया। हिंदी फिल्मों के दिग्गज गायक मोहम्मद रफी की 46वीं पुण्यतिथि पर ओल्ड लिस्नर्स ग्रुप ऑफ छत्तीसगढ़ जोन की ओर से स्वरांजलि कार्यक्रम रखा गया था।
कार्यक्रम की शुरुआत होते ही स्थानीय कलाकारों एवं रेडियो श्रोताओं ने एक के बाद एक रफी साहब के गीत पेश किए। “ये दुनिया ये महफिल”, “चौदहवीं का चांद हो”, “बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी” जैसे गीतों पर मौजूद श्रोता देर तक तालियां बजाते रहे। कई बुजुर्ग श्रोता तो गीतों के साथ गुनगुनाते भी नजर आए।
ओल्ड लिस्नर्स ग्रुप के प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल देवांगन ने कहा कि रफी साहब ने अपने 40 साल के करियर में करीब 7 हजार गीत गाए। भजन, गजल, देशभक्ति, रोमांटिक हर तरह के गीतों में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। 24 दिसंबर 1924 को पंजाब में जन्मे रफी साहब को 6 बार फिल्मफेयर और एक बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। 31 जुलाई 1980 को उनका निधन हो गया था, लेकिन आज भी उनकी आवाज लोगों के दिलों में जिंदा है।
देवांगन ने आगे कहा कि हमारा मकसद नई पीढ़ी को रफी साहब के गीतों से रूबरू कराना है। इसी कड़ी में हर साल पुण्यतिथि पर ऐसा आयोजन किया जाता है।
कार्यक्रम में रायपुर के कई संगीत प्रेमी और रेडियो श्रोता मौजूद थे। अंत में सभी ने खड़े होकर 2 मिनट का मौन रखकर रफी साहब को श्रद्धांजलि दी।




