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बुलंद टाइम्स न्यूज, रायपुर। समाजसेवा, निर्भीक पत्रकारिता और साहित्य-सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिलासपुर के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं समाजसेवी सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।

रायपुर में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिभा महासम्मेलन में मिला सम्मान, बिलासपुर के लिए गौरव का क्षण
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर 14 अगस्त 2026 को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘अखिल भारतीय प्रतिभा महासम्मेलन एवं पुरस्कार समारोह–2026’ में उन्हें “छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान” प्रदान किया गया।राष्ट्रीय स्तर के इस गरिमामय समारोह में देशभर से चयनित समाजसेवियों, साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों, कलाकारों एवं विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। समारोह में सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा पूर्व विधिक सलाहकार , माननीय राज्यपाल , छत्तीसगढ़ भीष्म प्रसाद पाण्डेय, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ योग आयोग , संजय अग्रवाल जी ; महापौर श्रीमती मीनल चौबे , रायपुर ; विधायक पुरंदर मिश्रा जी , रायपुर ; केपीएस प्रमुख राकेशकुमार मिश्रा सहित महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश से आए अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही । कार्यक्रम में प्रदेश प्रभारी , पतंजलि योग समिति, छत्तीसगढ़ डॉ. मनोज पाणीग्रही ; छत्रपती संभाजीनगर , महाराष्ट्र से डॉ. पंढरीनाथ रोकडे ; भुसावल , महाराष्ट्र से डॉ. दिलीपकुमार ललवाणी ; मुंबई से डॉ. गौतम ऋषि मोरे तथा भोपाल से महान साहित्यकार डॉ. सुनिता पेंद्रो की विशेष उपस्थिति ने समारोह को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया । समारोह के मुख्य संयोजक ऍड. क्रांति महाजन रहे ।यह आयोजन रेडियंट टैलेंट बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की संकल्पना एवं पहल पर तथा विभिन्न सामाजिक , शैक्षणिक , सांस्कृतिक एवं प्रतिभा-सम्मान से जुड़ी संस्थाओं के सहयोग एवं समन्वय से आयोजित किया गया यहां आयोजित इस महासम्मेलन की विशेषता छत्तीसगढ़ की कला , संस्कृति , लोकपरंपरा और प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच से जोड़ना रही । छत्तीसगढ़ की लोककला , लोकसंगीत , लोकनृत्य , साहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत को देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभावान व्यक्तित्वों के साथ एक मंच पर प्रस्तुत किया गया | समारोह में वक्ताओं ने कहा कि भारत की विविध भाषाएं , संस्कृतियां और परंपराएं देश की वास्तविक शक्ति हैं । इन्हें एक-दूसरे से जोड़कर “एक भारत , श्रेष्ठ भारत” की भावना को और मजबूत किया जा सकता है ।स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के इस समन्वय ने समारोह को विशेष आकर्षण प्रदान किया जहां संगीत , कला , संस्कृति , प्रतिभा-सम्मान और राष्ट्रभावना से परिपूर्ण वातावरण में उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों एवं प्रतिभाओं का उत्साहवर्धन किया ।समारोह राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकात्मता, समाज जागरण, भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रनिर्माण की भावना को समर्पित रहा। सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को यह सम्मान जनसरोकारों पर आधारित निर्भीक पत्रकारिता, साहित्य-सृजन तथा सामाजिक चेतना के क्षेत्र में उनके निरंतर योगदान के लिए प्रदान किया गया। पत्रकारिता में वे आमजन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं, वहीं साहित्य के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और प्रकृति-संस्कृति से जुड़े विषयों को स्वर देते रहे हैं। उनकी पहचान केवल पत्रकार और साहित्यकार के रूप में ही नहीं, बल्कि सक्रिय समाजसेवी के रूप में भी है। वे दिल्ली से संचालित अखिल वैश्विक क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। इसके साथ ही सामाजिक संस्था ‘हितार्थ एक सेवा’ के फाउंडर सेक्रेटरी के रूप में भी वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता तथा जरूरतमंदों की सहायता से जुड़े कार्यों में उनका निरंतर योगदान रहा है।साहित्य के क्षेत्र में उनकी चर्चित कृति ‘बोलती परछाइयां’ सहित विभिन्न विधाओं में उनका लेखन प्रकाशित हुआ है। उनकी लेखनी में सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं की स्पष्ट झलक मिलती है। वे पत्रकारिता और साहित्य को समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम मानते हैं। उनका कहना है – “कलम केवल लिखने का साधन नहीं, बल्कि परिवर्तन की शक्ति है।” राष्ट्रीय सम्मान मिलने पर बिलासपुर के वरिष्ठ साहित्यकार विनय कुमार पाठक, राघवेंद्र दुबे, रमेश चंद्र श्रीवास्तव, शीतल प्रसाद पाटनवार, सनत तिवारी, विवेक तिवारी,खरियार रोड से हरिवंश सिंह ठाकुर सहित अनेक साहित्यकारों, पत्रकारों, समाजसेवियों एवं शुभचिंतकों ने सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। शुभचिंतकों ने कहा कि यह सम्मान सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ की व्यक्तिगत उपलब्धि होने के साथ-साथ बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की साहित्यिक, पत्रकारिता एवं सामाजिक चेतना का भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।




