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जंगलों की आड़ में लकड़ी का खेल, ड्रोन से मिले सुराग, अब पुराने रिकॉर्ड से लेकर पूरे नेटवर्क तक जांच।
छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर बड़ी कार्रवाई के बाद सिर्फ लकड़ी जब्त करने तक सीमित नहीं जांच, रायघर रेंज के पुराने रिकॉर्ड और तस्करी की पूरी सप्लाई चेन भी रडार पर।
बुलंद टाइम्स न्यूज/दीपक साहू
मैनपुर। छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर हुई लकड़ी तस्करी के खिलाफ कार्रवाई अब सिर्फ जब्ती की कहानी नहीं रह गई है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व कार्रवाई ने जंगलों और सीमा क्षेत्र में सक्रिय एक संभावित बड़े नेटवर्क की जांच का रास्ता खोल दिया है। खास बात यह है कि इस बार टीम ने केवल जमीन पर तलाशी नहीं ली, बल्कि तकनीक और खुफिया सूचना के जरिए संदिग्ध ठिकानों तक पहुंच बनाई।
ओडिशा के नबरंगपुर जिले के रायघर रेंज अंतर्गत दासपुर गांव में ने ओडिशा पुलिस और वन विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई की। कार्रवाई से पहले थर्मल इमेजिंग ड्रोन से इलाके की निगरानी की गई और संदिग्ध लकड़ी भंडारण वाले स्थानों की पहचान की गई। इसके बाद प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड की मदद से तलाशी अभियान चलाया गया।
तीन ठिकाने और बड़ी मात्रा में लकड़ी, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं…
खुफिया सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर तीन संदिग्ध परिसरों की तलाशी ली गई। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में लकड़ी मिलने की बात सामने आई है। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ने मामले में वन अपराध दर्ज करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जब्त लकड़ी की मात्रा लगभग 3 से 4 घनमीटर बताई गई है, जिसकी गणना और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।
लेकिन इस कार्रवाई का सबसे बड़ा पहलू अब सामने आ रहा है जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर यह लकड़ी आई कहां से और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
अब लकड़ी की पूरी जर्नी खंगालेगी जांच टीम…
जांच केवल लकड़ी के मालिक तक सीमित नहीं रहेगी। एजेंसियां अब लकड़ी के पूरे सफर की पड़ताल करेंगी।
जांच के मुख्य बिंदुओं में शामिल है
लकड़ी का वास्तविक स्रोत क्या है?
क्या लकड़ी जंगलों से अवैध कटाई के जरिए लाई गई?
परिवहन में कौन-कौन शामिल था?
लकड़ी कहां रखी गई और किसे बेची जानी थी?
क्या इसके पीछे कोई संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय है?
क्या इस नेटवर्क को किसी ने आर्थिक या अन्य मदद पहुंचाई?
क्या जब्त लकड़ी का संबंध पहले जब्त किए गए वन अपराध के माल से है?
यानी जांच अब सिर्फ लकड़ी मिली किसके पास? तक सीमित नहीं, बल्कि लकड़ी जंगल से बाजार तक कैसे पहुंचती है? इस पूरे नेटवर्क को समझने की दिशा में बढ़ रही है।
पुराने मामलों के रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में…
इस पूरे मामले में रायघर रेंज से जुड़े पुराने जब्ती रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। दस्तावेज में उल्लेख है कि पहले की कुछ कार्रवाई से जुड़े जब्ती मेमो और अन्य रिकॉर्ड लंबे समय से उपलब्ध नहीं होने के कारण जांच और अभियोजन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
प्रारंभिक सूचना के आधार पर कुछ जब्त सागौन लकड़ी के स्रोत की जांच रायघर रेंज से जोड़कर की जा रही है। इस संबंध में संबंधित वन कार्यालय के रिकॉर्ड और पहले जब्त की गई लकड़ी के स्टॉक का सत्यापन आवश्यक बताया गया है। हालांकि किसी भी अनियमितता या संलिप्तता की पुष्टि विस्तृत दस्तावेजी जांच के बाद ही की जा सकेगी।
एक ही बॉर्डर बेल्ट में पहले भी मिल चुके हैं ऐसे संकेत…
दासपुर-सोनपुर-रायघर क्षेत्र में लकड़ी तस्करी से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी पहले भी सामने आ चुकी है। दिसंबर 2023 में भी इसी व्यापक सीमा क्षेत्र में संयुक्त कार्रवाई की गई थी। उस दौरान कथित तौर पर छत्तीसगढ़ क्षेत्र से सागौन लकड़ी को ओडिशा पहुंचाने की सूचना पर कार्रवाई हुई थी और 30 से अधिक आरोपियों के पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी।
बार-बार एक ही सीमा क्षेत्र में इस तरह की सूचनाएं सामने आने से अब जांच एजेंसियों का फोकस पूरे इलाके की सप्लाई चेन और अंतरराज्यीय संपर्कों पर बढ़ गया है।
ड्रोन, डॉग स्क्वॉड और खुफिया सूचना… नया मॉडल
USTR की इस कार्रवाई ने यह भी दिखाया कि वन अपराध से निपटने का तरीका बदल रहा है। अब केवल जंगल में गश्त या अचानक छापेमारी के बजाय तकनीक आधारित कार्रवाई को प्राथमिकता दी जा रही है,
इस ऑपरेशन में-खुफिया सूचना + अंतरराज्यीय समन्वय + थर्मल ड्रोन + डॉग स्क्वॉड + लक्षित तलाशी + कानूनी जांच
का एक साथ इस्तेमाल किया गया।
अधिकारियों का उद्देश्य सिर्फ अवैध लकड़ी पकड़ना नहीं, बल्कि अवैध कटाई से लेकर परिवहन, भंडारण और अंतिम उपयोग तक पूरे नेटवर्क की पहचान करना है।
अब बड़ा सवाल—जंगल से लकड़ी निकली कैसे और पहुंची कहां तक?
ताजा कार्रवाई के बाद जांच की दिशा साफ है—जब्त लकड़ी केवल एक सुराग हो सकती है। असली चुनौती अब उन लोगों और कड़ियों तक पहुंचने की है, जो जंगल से निकलने वाली लकड़ी को सीमा पार पहुंचाने, छिपाने और आगे खपाने की प्रक्रिया से जुड़े हो सकते हैं।
USTR की इस कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर लकड़ी तस्करी का पूरा नेटवर्क अब जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है। आने वाले दिनों में जांच से कई और अहम कड़ियां सामने आने की संभावना है।
छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा क्षेत्र में अवैध लकड़ी के परिवहन एवं भंडारण के संबंध में प्राप्त विशिष्ट गुप्त सूचना के आधार पर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) द्वारा दिनांक 24 अगस्त 2026 को ओडिशा के नबरंगपुर जिले के रायघर वन परिक्षेत्र अंतर्गत दासपुर गांव में अंतरराज्यीय तस्करी विरोधी कार्रवाई की गई।यह कार्रवाई ओडिशा पुलिस एवं नबरंगपुर वन विभाग के समन्वय से की गई। कार्रवाई का आधार सीमा क्षेत्र में अवैध सागौन लकड़ी की तस्करी एवं भंडारण से संबंधित प्राप्त खुफिया सूचना थी।तकनीक आधारित निगरानी एवं लक्षित तलाशी,USTR की टीम लगभग प्रातः 10:00 बजे कार्रवाई स्थल पर पहुंच गई थी। ओडिशा वन विभाग द्वारा आवश्यक तलाशी वारंट की औपचारिकताएं पूर्ण किए जाने के पश्चात लगभग 12:30 बजे तलाशी एवं कार्रवाई प्रारंभ की गई।तलाशी से पूर्व USTR टीम द्वारा थर्मल इमेजिंग ड्रोन के माध्यम से क्षेत्र की हवाई निगरानी की गई। ड्रोन की सहायता से संदिग्ध स्थानों, लकड़ी के भंडारण वाले परिसरों तथा तलाशी हेतु महत्वपूर्ण स्थानों की पहचान की गई।इस तकनीक आधारित निगरानी के कारण टीम को पारंपरिक रूप से व्यापक एवं अनियमित तलाशी के बजाय लक्षित एवं सटीक कार्रवाई करने में सहायता मिली।कार्रवाई के दौरान USTR की प्रशिक्षित कैनाइन ‘टीना’ (डॉग स्क्वाड) को भी तैनात किया गया, जिसका उपयोग छिपाकर रखी गई लकड़ी एवं अपराध से संबंधित अन्य सामग्री की तलाश में किया गया।
तीन परिसरों की तलाशी; अवैध लकड़ी जब्त…
खुफिया सूचना एवं ड्रोन से प्राप्त निगरानी इनपुट के आधार पर तीन संदिग्ध व्यक्तियों के परिसरों की तलाशी ली गई:
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक ने वरुण जैन अपने चर्चा में बताया वन विभाग की कार्यवाही लगातार जारी रहेगा वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है।




