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राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद सन्देश यात्रा आज नारायणपुर आहूजा पैलेस पहुंची।
सुरेश सोनी/बुलंद टाइम्स न्यूज
नारायणपुर। विहंगम योग संत समाज द्वारा कन्याकुमारी से आरंभ हुई राष्ट्रव्यापी ‘स्वर्वेद संदेश यात्रा’ के नारायणपुर पहुंचने पर नगरवासियों एवं श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। स्थानीय आहूजा पैलेस में आयोजित ‘जय स्वर्वेद कथा एवं ध्यान साधना सत्र’ में श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा।
इस अवसर पर स्वर्वेद कथामृत के प्रवर्तक एवं विहंगम योग के संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने अपने अमृत वचनों से जनमानस को आत्म-जागरण एवं सनातन संस्कृति के मूल मर्म की प्रेरणा दी।
सनातन धर्म ही हमारी पहचान व संस्कृति: संत प्रवर
सभा को संबोधित करते हुए पूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने सनातन संस्कृति और सृष्टि के शाश्वत नियमों की व्याख्या करते हुए कहा,
“सनातन धर्म केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि हमारी वास्तविक पहचान, संस्कृति और जीवन जीने की अमर पद्धति है। परमात्मा परम प्रकाश स्वरूप हैं; भौतिक जगत का कोई भी तेज उस परम प्रभु के दिव्य और अलौकिक प्रकाश की बराबरी नहीं कर सकता। वही हमारे प्राणों का भी प्राण है। जो कुछ भी उत्पत्तिवान है, वह नष्ट होगा ही—यह देह मरणधर्मा है। जैसे जन्म और मृत्यु का चक्र निरंतर चलता है, वैसे ही पूरी प्रकृति में सृष्टि और प्रलय का क्रम चल रहा है। भौतिक जगत की अंतिम परिणति क्षय है। यहां हर तत्व की अपनी आयु है—सूर्य की भी आयु है और अंधकार की भी। किन्तु जो घोर तमस से ढके होने के बावजूद भीतर सूक्ष्म रूप से प्रकाशमय होकर सदा विद्यमान रहता है, वही अविनाशी परमात्मा है।”
मन को साधने से जीवन सरल बनता है
संत प्रवर ने जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर बल देते हुए कहा,
“केवल शरीर की पुष्टि और इंद्रियों की तृप्ति मानव जीवन का लक्ष्य नहीं है। यह अमूल्य जीवन लोककल्याण और आत्म-साक्षात्कार के लिए मिला है। संसार की बाह्य लड़ाइयां भीतर की अशांति और हार से जन्म लेती हैं। यदि मनुष्य अपने मन को साध ले, तो जीवन स्वतः सरल और आनंदमय हो जाता है।”
उन्होंने बताया कि विहंगम योग के प्रणेता, अनंत श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज ने गहन साधना से प्राप्त दुर्लभ आध्यात्मिक ज्ञान को कालजयी ग्रंथ ‘स्वर्वेद’ के रूप में जन-जन के लिए सुलभ किया। स्वर्वेद वह चेतन प्रकाश है, जो अविद्या और अंधकार का नाश करता है। संत प्रवर ने उपस्थित जनसमुदाय को विहंगम योग की चेतन साधना का अभ्यास कराते हुए कहा कि यह साधना ‘स्वयं से स्वयं की दूरी’ मिटाने का सर्वोत्तम मार्ग है।
इस अवसर पर विहंगम योग संत समाज नारायणपुर के जिला कार्यकारिणी से श्री युधिष्ठिर देवांगन, श्री बबन यादव ,श्री घनश्याम देवांगन जी (जोधपुर टेलर्स), श्री संजय सेठिया जी (सिंगोड़ी तराई) तथा श्रीमती चंपा पोटाई (कलेपाल), श्री राजेन्द्र बेलसरिया(गौरदंड,छोटेडोंगर), संतोष बच्चन जी के साथ साथ श्री कमलजीत आहूजा , श्री नारायण मरकाम (अध्यक्ष जिला पंचायत,) श्री इंद्रप्रसाद बघेल (अध्यक्ष, नगरपालिका परिषद) श्री सुनील राठौर जी (अध्यक्ष, न्यू प्रेस क्लब), श्रीमति रमशिला झा (प्रदेश उपाध्यक्ष, महिला मोर्चा, भाजपा) श्री गुलाब बघेल जी(अध्यक्ष, सनातन धर्म मंच) नारायण प्रसाद साहू(संरक्षक) श्री जयप्रकाश शर्मा, संजय नंदी, बृजमोहन देवांगन, रमेश पांडे, शांतनु दुग्गा, अर्जुन कुमेटी , राम सिंह ठाकुर, बिंदेश महावीर, घनश्याम नेवरिया,मन्नूदास मानिकपुरी, सुधांशु मंडल, भीम देवांगन, खेमलाल नाग, श्री तेनसिंह ठाकुर जी, मरणशील, बिन्देश पात्र तथा नारायणपुर जिला के सामान्य नगर वासी और विभिन्न ग्रामों से आए ग्रामीण हजारों की संख्या में शामिल रहे।




