अमित दुबे की रिपोर्ट | बुलंद टाइम्स न्यूज़
रतनपुर। बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक विजयादशमी का पावन पर्व रतनपुर थाना परिसर में श्रद्धा, आस्था और परंपरा के साथ मनाया गया। दशहरे के शुभ अवसर पर थाना प्रभारी नीलेश पांडेय ने विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शस्त्र पूजन कर भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का निर्वहन किया।
शस्त्र पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि साहस, संयम, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह परंपरा संदेश देती है कि शक्ति का वास्तविक उद्देश्य किसी को भयभीत करना नहीं, बल्कि निर्बलों की रक्षा करना, अन्याय के विरुद्ध खड़े होना और समाज में शांति एवं सुरक्षा का वातावरण बनाए रखना है।
शस्त्रों की पूजा के साथ जनसेवा का संकल्प
विजयादशमी के अवसर पर रतनपुर थाना में आयोजित शस्त्र पूजन ने पुलिस के उस महत्वपूर्ण दायित्व को भी रेखांकित किया, जिसके केंद्र में आम नागरिकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था का पालन और समाज में शांति एवं सद्भाव बनाए रखना है। पुलिस के लिए शस्त्र केवल सुरक्षा का साधन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, अनुशासन और जनविश्वास की रक्षा का प्रतीक भी हैं।
दशहरा हमें यह प्रेरणा देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, सत्य और न्याय के मार्ग पर अडिग रहना चाहिए। इसी भावना के साथ शस्त्र पूजन की परंपरा पुलिसकर्मियों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और जनसेवा के उद्देश्य को सर्वोपरि रखने का संदेश देती है।
सुरक्षा के साथ विश्वास की भी जिम्मेदारी
रतनपुर की धार्मिक एवं पौराणिक धरती पर दशहरे के पावन अवसर पर संपन्न यह आयोजन आस्था और कर्तव्य के सुंदर संगम का प्रतीक रहा। शस्त्र पूजन के माध्यम से यह भाव उभरकर सामने आया कि वर्दी की असली पहचान केवल शक्ति नहीं, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता और जनता के प्रति जवाबदेही भी है।
विजयादशमी का पर्व यही संदेश देता है कि जब शक्ति के साथ विवेक, साहस के साथ संयम और अधिकार के साथ कर्तव्य जुड़ते हैं, तभी एक सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण समाज का निर्माण होता है। रतनपुर थाना परिसर में हुआ शस्त्र पूजन इसी भावना के साथ जनसुरक्षा, शांति और सेवा के संकल्प को स्मरण करने का अवसर बना।




