डे नारायण सिंह बघेल की रिपोर्ट;-
नारायणपुर: एक ओर सरकार में बैठे हुए नेता और उनके अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कि बड़ी बड़ी बाते करते हैं, लेकीन कुछ ग्रामीण क्षेत्र की जमीनी हकीकत कुछ अलग ही दिखाई दे रही हैं। मामला जनपद पंचायत नारायणपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत महिमागवाड़ी का जहां मड़मनार गांव से ग्राम पंचायत जाने वाली मुख्य सड़क कीचड़ से तब्दील हो चुकी है, जिसको लेकर ग्रामीण कई वर्षो से पकी सड़क बनवाने कि गुहार लगा रहे हैं। ग्रामीण ग्राम पंचायत से लेकर कलेक्टेट जनदर्शन में भी कई बार आवेदन दे कर शिकायत कर रहे है। पर कोई ज़िम्मेदार व्यक्ति सुध नहीं ले रहे हैं। वहीं ज़िम्मेदार व्यक्ति की बात करें तो कई वर्षो से ग्रामीणों को आश्वासन देते ही आ रहे हैं। हालांकि चुनाव दर चुनाव वोट लेने के लिए यहां पहुंचने वाले जनप्रतिनिधि हर बार ग्रामीणों की इस मांग पर पक्की सड़क बनवाने का वादा करते रहे हैं। लेकिन चुनाव जीतने के बाद किसी ने भी यहां पर पक्की सड़क निर्माण की कोई कोशिश नहीं की।
बता दे कि मड़मनार गांव से पंचायत जाने कि मार्ग में दो से तीन किलो मीटर दूरी तक सड़क खस्ताहाल हुई है। सड़क में पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण यह सड़क कीचड़ से पसरा हुआ है। जगह- जगह पर बड़े-बड़े गड्ढे हुए हैं,और गड्ढों में पानी का भराव और कीचड़ होने के कारण राहगीरों को आवाजाही में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत के जनप्रतिनिधियों के द्वारा बारिश के पहले ही सड़क मरम्मत का कार्य नहीं कराए जाने के कारण गांव से पंचायत जाने का मुख्य मार्ग की हालत बदतर हो गई है। जिस पर अब बारिश के कारण कीचड़ ही कीचड़ नजर आता है। कहीं-कहीं तो गड्ढे में घुटनों-घुटनों पानी भरा नजर आता है। वहीं महिमागवाड़ी ग्राम पंचायत की लापरवाही के कारण सड़क, पानी जैसे कई समस्या से जूझते रहते हैं यहां के ग्रामवासी। लेकिन ग्रामीण की समस्या को दूर करने वाले कोई नहीं है।
स्कूल विद्यार्थी मनीष दुग्गा, फुलेश्वरी बघेल ने बताया कि गांव मड़मनार से महिमागवाड़ी आने जाने वाली सड़क बहुत जर्जर हो चुकी हैं,जिसके चलते हम लोगों को जाने आने में बहुत परेशानी होता हैं। गांव से लगभग 2- 3 तीन किलो मीटर दूर तक सड़क पूरी तरह से कीचड़ से पसरा हुआ है और सड़क में बड़े बड़े गढ्ढे हुए हैं। कहीं राहगीर बड़े वाहनों में तेज गति से गुजरने पर कीचड़ से कपड़े सन जाते है। और ऊपर से दुर्घटना होने की खतरा बना रहता है।कपड़ा खराब हो जाता हैं तो हम कभी – कभी स्कूल तक नहीं पहुंच पाते रास्ता से ही घर वापस जाना पड़ता हैं। जिससे हमारा पढ़ाई भी प्रभावित होता हैं। आगे बताया हर वर्ष बारिश के दिनों में इस सड़क की हालत इतनी खराब रहती है। 24 घंटों सड़क कीचड़ से भरा रहता है।
वहीं स्थानीय ग्रामवासी सीतूराम सलाम, और सोमधर सलाम ने बताए कि इस गांव में 100 घरों कि बस्ती बसा हुआ है लेकिन सड़क, पानी, जैसे कई मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। अभी वर्तमान में जर्जर सड़क कि स्थिति की बात करे तो गांव मड़मनार से महिमागवाड़ी जाने का मुख्य रास्ता गांव से करीब दो से तीन किलो मीटर दूरी तक का सड़क पर बड़ा बड़ा गढ्ढा हुआ है, गढ्ढा में पानी भर जाने के कारण सड़क नज़र ही नहीं आता। वहीं ग्रामवासियों ने बताए कि ग्रामवासी अपना जान जोखिम में डालकर रोजाना इसी सड़क से होकर बस्ती के सैकड़ो से अधिक ग्रामवासी आए दिन शासकीय कामकाज व घर कि राशन सामान जैसे अन्य काम से भी आना जाना करते है। साथी – साथ स्कूल बच्चों का भी आवाजाही होता है। वहीं ग्राम पंचायत के सरपंच से लेकर जनप्रतिनिधि भी इसी रास्ते से आना जाना करते हैं। इसके बावजूद भी सड़क निर्माण नहीं कराया जा रहा है। अगर पंचायत इस ओर ध्यान देती और समय से पहले सड़क पर गड्डों की भराई हो जाती तो आज यह स्थिति नहीं होती। गांव में सड़क निर्माण के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
वहीं पूरे मामले पर पंचायत के सरपंच और नारायणपुर जनपद पंचायत सीइओ लोकनाथ पटेल ने कैमरा के सामने में कुछ भी कहने से बचते नजर आए। इससे आप अंदाज़ लगा सकते हैं, कि इस मामले पर कही ना कही ग्राम पंचायत के ज़िम्मेदार व्यक्ति एवं उच्च अधिकारीयों कि भी लापरवाही दिखाई दे रही हैं। अब देखने वाली बात होगी कि खबर प्रकाशित होने के बाद जो ज़िम्मेदार व्यक्ति हैं, किस प्रकार से मामला को संज्ञान में लेकर, ग्रामीणों कि समस्या को दूर करते हैं। या ग्रामीणों को आश्वासन देते ही रहेंगे।



