अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर | धार्मिक व पौराणिक नगरी रतनपुर में महामाया मन्दिर के पीछे बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग कर बिना डायवर्सन के खरीद बिक्री करने का गोरखधंधा तेजी से पनप रहा है। रतनपुर मे जनसंघी नेता नामचीन भू माफिया सक्रिय हैं।
राजस्व विभाग की कथित सांठगांठ से जारी अवैध प्लाटिंग की खरीद फरोख्त के मामले में प्रशासनिक उदासीनता से स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवालिया निशान लग रहा है। शहर से लेकर गांव तक अनुमति के बगैर जमीन की अफरा तफरी को अंजाम दिया जा रहा।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के बिना कई एकड़ खेती वाली जमीन बेची जा रही है। प्रशासनिक अनुमति के बगैर मुरुम की सड़क बनाकर प्लाट कटिंग करने और बेचने का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। प्रशासन की उदासीनता की वजह से अवैध प्लाटिंग करने वाले आपराधिक प्रवृत्ति के भू माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
आपको बता दे कि रतनपुर महामाया मंदिर के पीछे में आदिवासी जमीन को कालोनाइजर एक्ट की धज्जियां उड़ाते हुए भू माफियाओं ने भूमि को बिना डायवर्सन कराए प्लाटिंग कर बेच दी है और बेचने का सिलसिला जारी है।
नगर में अवैध प्लाटिंग कर जमीन की खरीद बिक्री में भू माफिया मालामाल हो रहे है। ये भू माफिया बगैर प्रशासनिक अनुमति के कई एकड़ भूमि को बगैर डायवर्सन कराए अवैध प्लाटिंग कर बेचने की तैयारी में हैं। किसानों को झांसे में लेकर कम दाम में जमीन का सौदा कर बगैर प्रशासनिक अनुमति के अवैध प्लाटिंग की जा रही है। जिस पर प्रसासन को भनक लगते ही नामान्तरण पर रोक लगाते ही नोटिस जारी किया गया है।
बगैर रेरा पंजीयन के चल रहा अवैध कारोबार-
जानकारी के मुताबिक अवैध प्लाटिंग का काम जो जमील दलाल कर रहे हैं, उनका रेरा में पंजीयन तक नहीं हैं। किसानों की खेती की जमीन का सौदा कर,कृषि भूमि का बगैर डायवर्सन प्लाट के रुप में टुकड़े कर रहे हैं, जिन्हें खुद का प्रोजेक्ट बताकर धड़ल्ले से बेरोक टोक बेचा जा रहा है। इसके लिए जमीन माफिया खुद ही मुरुम की सड़कें भी बनाव रहे हैं। प्लाट में 25 से 30 फीट सड़क और आकर्षक उपहार बताकर प्लाटिंग के अवैध कार्य को बेखौफ अंजाम दिया जा रहा।
सरकार को भारी राजस्व का नुकसान-
जमीन दलाल असली भूस्वामियों से एकड़ के भाव में जमीन का एग्रीमेंट कर उसे वर्गफीट के हिसाब से बेचते हुए करोड़ो रुपये की चपत सरकार को लगा रहे हैं।
दो हजार वर्गफीट से लेकर 2400 वर्गफीट तक के प्लाट लोगों को धोखे में रखकर अवैध तरीके से बेचा जा रहा है। भू माफिया जमीन को मनमाने कीमत पर बिक्री कर मालामाल हो रहे हैं। प्लाट खरीदने वालों के साथ तो धोखाधड़ी हो ही रही हैं, साथ ही शासन को राजस्व का भी चूना लग रहा है। इस अवैध कारोबार में कथित राजस्व अमले की भूमिका संधिग्ध है।
आदिवासी जमीन को टुकड़े कर इन्हें बेच
खसरा नम्बर 3298/5 जो दिलीप कुमार मरावी के नाम को दर्जन भर से ऊपर राजेस पैकरा,महेश कुमार जगत,सलीके राम मरकाम,योगेश्वर सिरसो,रमाकांत स्याम,आदित्य सिंग मरावी,दिलीप कुमार राज, कैलास सिंह पैकरा ,बसन्त कुमार पैकरा,मोहन कुमार चेतम ,महेंद्र कुमार पोर्ट ,जगमोहन मरकाम को बेचा गया है ।
भनक लगते ही नामान्तरण रोका
गुपचुप तरीके से हो रहे इस आदिवासी जमीन पर प्लाटिंग की जानकारी प्रसासन को लगते ही नामान्तरण पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया गया है।
ऊपरी पहुच का फायदा उठाने के फिराक में
उक्त जमीन को एक जनसंघी नेता के द्वारा टुकड़े में कर खेला किया जा रहा है ये नेता ऊपरी पहुच का फायदा उठाने के फिराक में लगा हुआ है रुके नामान्तरण को ऊपरी पहुच बताकर करवाने के फिराक में हैं।



