रायपुर | बुलंद टाइम्स | अनीष मिश्रा की रिपोर्ट
रायपुर शहर में लगातार बढ़ती ई-रिक्शा की संख्या अब आम नागरिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। बीते कुछ समय से ई-रिक्शा चालकों द्वारा यातायात नियमों की अनदेखी खुलेआम देखने को मिल रही है, जिससे सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
इस समस्या की गंभीरता का अंदाजा 5 अप्रैल को पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में हुई एक दर्दनाक घटना से लगाया जा सकता है, जिसने शहर को झकझोर कर रख दिया। जानकारी के अनुसार, एक ई-रिक्शा चालक ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए पैदल जा रही महिला पूर्णिमा को कुचल दिया। इस हादसे में महिला के सिर पर गंभीर चोट आई, जिसके चलते उन्हें 18 टांके लगाने पड़े, वहीं पीठ में भी गंभीर चोट के कारण खून के थक्के (ब्लड क्लॉटिंग) जम गए।
घटना यहीं नहीं रुकी—महिला को टक्कर मारने के बाद भी ई-रिक्शा चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया और आगे बढ़ते हुए एक स्कूटी को भी जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में स्कूटी चालक भी घायल हो गया। यह पूरी घटना ई-रिक्शा चालकों की लापरवाही और अनियंत्रित ड्राइविंग का भयावह उदाहरण बनकर सामने आई है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि बड़ी संख्या में 15 से 18 वर्ष के नाबालिग बच्चे ई-रिक्शा चलाते नजर आ रहे हैं। इन्हें न तो ट्रैफिक नियमों की जानकारी है और न ही वाहन संचालन का पर्याप्त अनुभव, जिससे वे खुद के साथ-साथ अन्य लोगों की जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं।
शहर में ई-रिक्शा चालकों की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे बिना किसी संकेत के अचानक लेन बदल लेते हैं। कई बार देखा गया है कि चालक साइड लेन से सीधे बीच सड़क या दूसरी लेन में मुड़ जाते हैं, बिना पीछे देखे या इंडिकेटर दिए। इस तरह की तेज और अव्यवस्थित ड्राइविंग से पीछे चल रहे वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
रात के समय स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। कई ई-रिक्शा चालक बैटरी बचाने के उद्देश्य से अपने वाहनों की लाइट तक नहीं जलाते, जिससे अंधेरे में वे दिखाई नहीं देते और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की ओर से इस समस्या पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। न तो सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं और न ही नियमित जांच या कार्रवाई देखने को मिल रही है।
निष्कर्ष:
5 अप्रैल की यह घटना एक चेतावनी है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह समस्या और भी भयावह रूप ले सकती है। आम जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।





