नारायणपुर | जिला अस्पताल नारायणपुर के समस्त चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने आज 26 जून 2025 को एकजुट होकर बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) की समस्त सेवाएं बंद कर दीं। यह निर्णय अस्पताल प्रशासन को सौंपे गए एक गंभीर पत्र के आधार पर लिया गया, जिसमें अतिरिक्त कलेक्टर बीरेन्द्र बहादुर पंचभाई के व्यवहार को लेकर गहरी नाराजगी जताई गई थी।
चिकित्सकों द्वारा सौंपे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि पंचभाई ने समय-समय पर जिला अस्पताल के डॉक्टरों के साथ अपने कक्ष में दुर्व्यवहार किया, अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया और सेवा नियमों की अवहेलना करते हुए चिकित्सकों को निजी इलाज के लिए निवास पर बुलाया। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के व्यवहार से कार्यस्थल का माहौल तनावपूर्ण और असहज हो गया है।
सबसे ताजा मामला शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जयश्री साहू के साथ घटित हुआ, जब वे अपने स्वास्थ्य कारणों से ट्रांजिट हॉस्टल के रिक्त कक्ष क्रमांक 8 के लिए आवेदन लेकर अतिरिक्त कलेक्टर के पास पहुँचीं। परंतु वहां उन्हें “दो कौड़ी के डॉक्टर” कहकर अपमानित किया गया।
डॉक्टरों ने आरोप लगाया है कि एक महिला मरीज, जो खुद को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की धर्मपत्नी सुचिता बताती हैं, ने भी रेडियोलॉजि विभाग के कर्मचारियों से दुर्व्यवहार किया।
चिकित्सा समुदाय ने स्पष्ट किया है कि वे अपने आत्मसम्मान और पेशेवर गरिमा से समझौता नहीं कर सकते, और जब तक अतिरिक्त कलेक्टर श्री बीरेन्द्र बहादुर पंचभाई डॉ. जयश्री साहू से लिखित और सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तब तक ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्यवाही नहीं हुई, तो वे आपातकालीन सेवाएं भी बंद करने को विवश होंगे।
अस्पताल परिसर में आज शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें सभी चिकित्सक, स्टाफ नर्स और कर्मचारीगण शामिल हुए। उन्होंने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर “सम्मान नहीं, तो सेवा नहीं”, “डॉक्टरों का अपमान, नहीं सहेगा नारायणपुर अस्पताल” जैसे नारे लगाए।
इस विरोध के कारण स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हो गई हैं और जिला अस्पताल में अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है।
प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं, कि मरीजों की इस गंभीर स्थिति के समाधान के लिए कोई त्वरित कदम क्यों नहीं उठाया गया।
अब पूरे जिले की नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं — कि वह इस गंभीर मामले में किस प्रकार की कार्रवाई करता है और कब तक चिकित्सकों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए समाधान प्रस्तुत करता है।



