नागेश साहू की रिपोर्ट :-
छत्तीसगढ़/मुंगेली – कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) का पावन पर्व देश भर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसे देवोत्थान एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु अपनी चार महीने की लंबी योगनिद्रा (Chaturmas) से जागृत होते हैं और पुनः सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं।
पर्व का महत्व: शुभता का पुनरागमन
देवउठनी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह तिथि चतुर्मास की समाप्ति का प्रतीक है, जिसके बाद से सभी प्रकार के मांगलिक कार्य (Auspicious Ceremonies) फिर से शुरू हो जाते हैं।
विवाह मुहूर्त: भगवान विष्णु के जागने के साथ ही विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ अनुष्ठानों के लिए मुहूर्त खुलने लगते हैं। यह दिन भारत में विवाह के मौसम की शुरुआत का प्रतीक भी है।
धार्मिक मान्यता: ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत और विधिवत पूजा करने से भक्तों के सभी पापों का नाश होता है और उन्हें सुख, शांति, समृद्धि तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।
तुलसी विवाह: देवउठनी एकादशी के अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) का आयोजन किया जाता है, जिसमें तुलसी माता का विवाह भगवान शालिग्राम (विष्णु का स्वरूप) से किया जाता है। कई स्थानों पर एकादशी के दिन ही तुलसी विवाह संपन्न होता है।
पूजा विधि और अनुष्ठान
भक्त इस दिन भगवान विष्णु को जगाने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
व्रत और पूजा: श्रद्धालु सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं।
भगवान को जगाना: भगवान विष्णु की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित कर उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। रात में विशेष रूप से शंख बजाकर, घंटी बजाकर और भक्तिमय गीत गाकर भगवान को योगनिद्रा से जगाने का अनुष्ठान किया जाता है।
तुलसी पूजन: भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन तुलसी के पौधे का विशेष पूजन किया जाता है। कई श्रद्धालु तुलसी के पौधे पर गन्ना, शकरकंदी, सिंघाड़ा और अन्य मौसमी फल अर्पित करते हैं।
दीये जलाना: घर के बाहर और मंदिर में दीपक जलाए जाते हैं, जो जीवन में अंधकार पर प्रकाश की जीत और शुभता के आगमन का प्रतीक हैं।
संदेश: जागृति और नई शुरुआत
देवउठनी एकादशी केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन में जागृति और सकारात्मकता का भी संदेश देती है। यह हमें अपने भीतर की चेतना को जगाने और धर्म, सेवा तथा परोपकार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
अगर आप देवउठनी एकादशी से जुड़े किसी विशेष अनुष्ठान या व्रत कथा के बारे में जानकारी चाहते हैं, तो कृपया बताएं।



