सुरेश सोनी की रिपोर्ट :-
बस्तर संभाग। लगातार 11 महीनों से लंबित CRMC (नक्सल क्षेत्र प्रोत्साहन राशि) के भुगतान न होने और सरकार द्वारा कई बार आश्वासन देने के बावजूद कोई ठोस निर्णय न लिए जाने पर बस्तर संभाग के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, RMA, ANM व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने सामूहिक रूप से बड़ा कदम उठाते हुए घोषणा की है कि 5 दिसंबर 2025 से संपूर्ण बस्तर संभाग में शाम की OPD सेवाएं एक सप्ताह के लिए बंद रहेंगी।
यह निर्णय जिला अस्पताल, CHC व PHC स्तर पर नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोण्डागांव और जगदलपुर सहित पूरे संभाग के डॉक्टर्स के संयुक्त निर्णय से लिया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि कई महीनों से पत्र लिखने, बैठकों और व्यक्तिगत मुलाकातों के बावजूद अभी तक लंबित राशि जारी नहीं की गई है, जबकि 1 दिसंबर तक भुगतान का स्पष्ट आश्वासन दिया गया था।
डॉक्टर्स का कहना है कि कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया तथा DHS कमिश्नर एवं MD NHM डॉ. प्रियंका जे. शुक्ला द्वारा कई बार आश्वासन दिए जाने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं हो सकी, जिस कारण स्वास्थ्य कर्मियों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा है।
डॉक्टरों का स्पष्ट बयान
“सरकार ने हमें आंदोलन के लिए मजबूर किया है।
यदि 12 दिसंबर तक लंबित राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो
13 दिसंबर 2025 से बस्तर संभाग में पूर्ण OPD बंद करने का निर्णय लिया जाएगा।
इस बीच आपातकालीन सेवाएँ पूर्ववत चालू रहेंगी, ताकि जनता को कोई असुविधा न हो।”
आंदोलन का कारण
• 11 महीनों से भुगतान लंबित, डॉक्टरों की प्रति व्यक्ति राशि लगभग ₹2.5–3 लाख, नर्सिंग स्टाफ ₹30,000–₹40,000
• अत्यंत जोखिमपूर्ण LWE (नक्सल प्रभावित) क्षेत्रों में कार्य
• नक्सल पोस्टमार्टम, जमीन स्तर पर ट्रायेज, बम धमकी क्षेत्रों में सेवा
• परिवार से दूर, न्यूनतम संसाधनों में दिन–रात सेवा
आंदोलन का स्वरूप
📍 5–12 दिसंबर — शाम की OPD बंद
📍 आपातकालीन सेवाएँ बिना बाधा चलती रहेंगी
📍 13 दिसंबर से पूर्ण OPD बंद — यदि भुगतान नहीं
डॉक्टरों ने कहा कि यह लड़ाई केवल धन के लिए नहीं, बल्कि सम्मान, मनोबल और अधिकार के लिए भी है।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस विभाग को नक्सल क्षेत्र प्रोत्साहन राशि समय से दी जाती है, जबकि स्वास्थ्य विभाग को लगातार नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, जबकि कठिन परिस्थितियों में दोनों समान जोखिम पर काम करते हैं।
बस्तर संभाग के सभी जिलों ने इस आंदोलन में एकता का परिचय देते हुए कंधे से कंधा मिलाया है। यह बस्तर स्वास्थ्य सेवाओं के इतिहास में सबसे बड़ा सामूहिक आंदोलन माना जा रहा है।



