- प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना में खुली लूट, पंचायत सचिव बनी ठेकेदार — पूरी राशि निकालकर छोड़ दिऐ अधूरे मकान
अमित दुबे की रिपोर्ट:-
रतनपुर/कोटा। कोटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चपोरा में प्रधानमन्त्री जनमन आवास योजना (ग्रामीण) के नाम पर बैगा आदिवासियों के साथ खुलेआम अन्याय और लूट का गंभीर मामला सामने आया है। जिन गरीब बैगा परिवारों को पक्के आवास का सपना दिखाया गया था, आज वही परिवार अधूरे, बिना छत और बिना सुविधाओं वाले घरों में जीवन बिताने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि योजना की पूरी राशि निकाल ली गई, लेकिन ज़मीन पर निर्माण अधूरा ही छोड़ दिया गया।
सचिव बनी ठेकेदार, नियमों की उड़ाई धज्जियां
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार पंचायत सचिव ने ही ठेकेदार की भूमिका निभाते हुए निर्माण कार्य अपने स्तर पर कराया।
प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के विपरीत लाभार्थियों को न तो निर्माण की जिम्मेदारी दी गई और न ही पारदर्शिता बरती गई। मस्टर रोल, सामग्री खरीदी और मजदूरी भुगतान में भारी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। आरोप है कि सचिव ने किस्तों में आई पूरी राशि खाते से निकलवा ली, जबकि कई मकानों में केवल दीवारें खड़ी हैं, कहीं छत नहीं तो कहीं दरवाजे-खिड़कियां तक नहीं लगीं।

बैगा परिवार आज भी कच्चे हालात में
बैगा आदिवासी परिवारों का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि “घर बनकर तैयार हो जाएगा”, लेकिन महीनों-सालों बाद भी स्थिति जस की तस है। बारिश में घरों में पानी भर जाता है और गर्मी में धूप से बचाव तक नहीं। कुछ परिवार तो अधूरे ढांचे में रहने को मजबूर हैं, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायतें दबाईं गईं, कार्रवाई शून्य
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें टालमटोल किया गया। पंचायत स्तर पर मामले को दबाने की कोशिश हुई और अब तक किसी भी जिम्मेदार पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विकासखंड कार्यालय से लेकर जिला स्तर तक निगरानी और ऑडिट पर भी सवाल उठ रहे हैं—यदि समय-समय पर भौतिक सत्यापन हुआ होता, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
प्रशासनिक संरक्षण के आरोप
ग्रामीणों ने पूरे मामले में प्रशासनिक संरक्षण का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बिना मिलीभगत के न तो पूरी राशि निकाली जा सकती थी और न ही वर्षों तक अधूरे मकानों पर आंखें मूंदी जा सकती थीं। यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि आदिवासी अधिकारों के हनन का भी है।

जांच व पुनर्निर्माण की मांग
- बैगा समाज और ग्रामीणों ने मांग की है किपूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,
- दोषी पंचायत सचिव/जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई हो,
- निकाली गई राशि की वसूली कराई जाए,
- अधूरे आवासों को तत्काल पूर्ण कराकर हैंडओवर किया जाए।
- यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों ने आंदोलन और शिकायत को राज्य व केंद्र स्तर तक ले जाने की चेतावनी दी है।
प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना गरीबों के सिर पर छत देने की योजना है, लेकिन चपोरा में यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है—जहां बैगा आदिवासियों का हक़ काग़ज़ों में पूरा, और ज़मीन पर अधूरा है।



