छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र से एक बेहद खास और सकारात्मक खबर सामने आई है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित कोडलियार इलाके में मध्य रात्रि के दौरान जवानों ने एक दुर्लभ प्रजाति की छिपकली को देखा है। यह कोई सामान्य छिपकली नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से लेपर्ड गेको के नाम से जानी जाने वाली प्रजाति है, जो जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
रिपोर्ट:
नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के कोडलियार क्षेत्र में तैनात जवान जब नियमित रात्रि गश्त पर थे, उसी दौरान उनकी नजर इस दुर्लभ जीव पर पड़ी। सतर्कता दिखाते हुए जवानों ने न केवल इसे सुरक्षित दूरी से देखा, बल्कि इसका वीडियो और फोटो भी रिकॉर्ड किया। यह दृश्य अपने आप में खास है, क्योंकि इस प्रजाति का इस क्षेत्र में दिखाई देना बेहद कम दर्ज किया गया है।
लेपर्ड गेको आमतौर पर सूखे, चट्टानी और सदाबहार जंगलों वाले इलाकों में पाया जाता है। इसका शरीर आकर्षक रंगों से सजा होता है, जिसमें पीले और गहरे भूरे रंग के धब्बे और पट्टियां होती हैं। इसकी पूंछ खास पहचान रखती है, जो शरीर से अलग दिखती है और उस पर सफेद व काले रंग के स्पष्ट पैटर्न होते हैं। यही कारण है कि इसे “लेपर्ड” यानी तेंदुए जैसी बनावट के कारण यह नाम मिला है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों का दिखना किसी भी क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिति को दर्शाता है। अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील और घने जंगलों में इस जीव की मौजूदगी यह संकेत देती है कि यहां का पारिस्थितिकी तंत्र अब भी संतुलित और जीवंत है।
वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों का मानना है कि इस तरह की खोजें न केवल जैव विविधता के संरक्षण के लिए अहम हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि मानव हस्तक्षेप के बावजूद प्रकृति अपने अस्तित्व को बनाए रखने में सक्षम है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि ऐसे दुर्लभ जीवों के संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता और सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी हैं, ताकि इनकी प्राकृतिक आवास में कोई खतरा उत्पन्न न हो।
निष्कर्ष:
नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में लेपर्ड गेको का मिलना एक सकारात्मक संकेत है, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाता है। यह घटना न केवल स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक प्रेरणादायक संदेश देती है।



