अमित दुबे की रिपोर्ट
मल्हार। भगवान परशुराम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर धर्म नगरी मल्हार में भक्ति, उत्साह और सामाजिक समरसता का अद्भुत नजारा देखने को मिला। ब्राह्मण परिवार मल्हार के तत्वावधान में आयोजित भव्य शोभायात्रा ने पूरे नगर को श्रद्धा और उल्लास के रंग में रंग दिया। इस ऐतिहासिक आयोजन में न केवल मल्हार, बल्कि मस्तुरी, सुकुलकारी, लोहर्सी, चिस्दा, वेदपरसदा, जयरामनगर, जैतपुर, बेटरी सहित आसपास के अनेक गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु, समाज के गणमान्य नागरिक और युवा वर्ग उत्साहपूर्वक शामिल हुए।
शाम 5 बजे डिडिनेश्वरी मंदिर से विधिवत पूजा-अर्चना और जयघोष के साथ शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। भगवान परशुराम के जयकारों, भक्ति गीतों और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर सभा स्थल तक पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बन रही थी, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो गया।
शोभायात्रा की विशेष आकर्षण भगवान परशुराम की सजीव झांकियां, धार्मिक ध्वज, पारंपरिक वेशभूषा और अनुशासित व्यवस्था रही। जगह-जगह स्थानीय नागरिकों द्वारा जलपान, पुष्पवर्षा और स्वागत की व्यवस्था की गई, जिसने इस आयोजन को जन-उत्सव का स्वरूप प्रदान कर दिया। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी मुस्तैदी से तैनात रहा।
इस आयोजन में समाज के वरिष्ठजनों के साथ-साथ युवाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। युवाओं के जोश और समर्पण ने कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। ब्राह्मण परिवार के बुजुर्गों के मार्गदर्शन में आयोजित इस शोभायात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता को सुदृढ़ करना, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर भगवान परशुराम की महाआरती की गई। इसके पश्चात समाज के वरिष्ठ बुजुर्गों और माताओं का शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। साथ ही मेधावी विद्यार्थियों और समाज के प्रतिभावान युवक-युवतियों को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने भगवान परशुराम के आदर्शों पर चलने और समाज में सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया।
यह भव्य शोभायात्रा मल्हार नगर में लंबे समय तक याद की जाएगी, जिसने न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रभावशाली संदेश दिया।




