अमित दुबे की रिपोर्ट
रतनपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने तथा नई पीढ़ी को उससे जोड़ने के उद्देश्य से रविवार, 26 अप्रैल 2026 को रतनपुर में ‘बाबू रेवाराम स्मृति’ प्राचीन पांडुलिपि एवं इतिहास सम्मेलन का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन ‘बाबू रेवाराम साहित्य पीठ’, ‘बाबू प्यारेलाल गुप्त सृजन पीठ’ और ‘महाकोसल इतिहास परिषद्’ रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में संपन्न होगा।
कार्यक्रम का आयोजन सुबह 10 बजे से पंढरीनाथ मंदिर, बड़ी बाजार, रतनपुर में किया जाएगा, जिसमें इतिहास, साहित्य और पुरातत्व से जुड़े विद्वानों, शोधार्थियों और आमजन की सहभागिता रहेगी।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध इतिहासकार बाबू प्यारेलाल गुप्त की महत्वपूर्ण कृति ‘रतनपुर राज्य का इतिहास’ (द्वितीय अंक) का विधिवत विमोचन किया जाएगा। इसके साथ ही सम्मेलन में प्राचीन पांडुलिपियों, दुर्लभ दस्तावेजों एवं ताम्रपत्रों की विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जो रतनपुर के गौरवशाली अतीत की झलक प्रस्तुत करेगी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. रामेन्द्र मिश्र (पूर्व आचार्य, इतिहास व संस्कृति विभाग, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर) उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जी.एल. रायकवार (पूर्व वरिष्ठ पुरातत्वविद्, पुरातत्त्व विभाग रायपुर) करेंगे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. सुभाष दत्त झा (रायपुर) एवं श्री विजय कुमार गुप्ता (बिलासपुर) अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
सम्मेलन के दौरान रतनपुर की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों, पुरा संपदा और सांस्कृतिक वैभव पर केंद्रित व्याख्यानमाला का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें विद्वान वक्ता अपने शोध और विचार साझा करेंगे। यह कार्यक्रम न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए बल्कि विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए भी अत्यंत उपयोगी साबित होगा।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. राजेन्द्र कुमार वर्मा एवं संचालक ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव ने क्षेत्र के सभी नागरिकों, इतिहास प्रेमियों और बुद्धिजीवियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।
इस आयोजन को सफल बनाने में आनंद नगरकर, अनिल शर्मा, दीपक कहरा, श्रीमती पुष्पा तिवारी, जनक राम साहू, दिनेश तिवारी, हेमंत सिंह क्रांति, मुकेश श्रीवास्तव, प्रमोद कश्यप, रामरतन भारद्वाज, मदन सिंह ठाकुर, रविन्द्र सोनी एवं रामानंद यादव सहित कई लोगों का विशेष सहयोग मिल रहा है।
यह सम्मेलन रतनपुर की प्राचीन पहचान और ऐतिहासिक गौरव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।



