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कृषि अधिकारियों ने रोग-कीट प्रबंधन, संतुलित पोषण और जल निकासी की दी तकनीकी जानकारी…
बुलन्द टाइम्स न्यूज/अमरजीत सिंह
कोरिया/बैकुंठपुर। बदलते मौसम और लगातार वर्षा की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग के उपसंचालक कृषि श्री राजेश भारती एवं कृषि विज्ञान केंद्र, कोरिया के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार अनंत ने सोनहत विकासखंड के ग्राम पंचायत बोड़ार एवं सुंदरपुर में खरीफ फसलों का निरीक्षण किया। इस दौरान धान, अरहर, उड़द एवं मूंगफली की फसलों की स्थिति, रोग-कीट प्रकोप, पोषक तत्वों की उपलब्धता तथा खेतों में जल निकासी का अवलोकन किया गया।
ग्राम बोड़ार में कृषक बाबूलाल, संतकुमार, रविन्द्र एवं दीपक सिंह के धान खेतों का निरीक्षण कर अधिकारियों ने किसानों को फसल की वर्तमान अवस्था के अनुरूप रोग-कीट की पहचान, पोषण प्रबंधन, जल निकासी एवं मौसम आधारित कृषि कार्यों की जानकारी दी।
धान में रोग-कीट की नियमित निगरानी की सलाह…
निरीक्षण के दौरान बताया गया कि धान की फसल वर्तमान में पैनिकल इनिशिएशन एवं ईयर हेडिंग अवस्था में है। इस अवस्था में तना छेदक, भूरा माहू, हरा माहू एवं पत्ती मोड़क जैसे कीटों तथा ब्लास्ट, बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट एवं शीथ ब्लाइट जैसे रोगों की नियमित निगरानी आवश्यक है। अधिकारियों ने किसानों को रोग-कीट की सही पहचान और प्रकोप की पुष्टि के बाद ही अनुशंसित कृषि रसायनों का प्रयोग करने की सलाह दी।
तना छेदक, माहू एवं पत्ती मोड़क के प्रबंधन के लिए कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित रसायनों एवं मात्रा की जानकारी किसानों को दी गई। वहीं ब्लास्ट एवं शीथ ब्लाइट के लक्षण दिखाई देने पर रोग की स्थिति के अनुसार अनुशंसित फफूंदनाशी का प्रयोग करने तथा बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट की स्थिति में अनावश्यक नत्रजन के प्रयोग से बचने की सलाह दी गई।
पोटाश की कमी और जल निकासी पर जोर…
निरीक्षण के दौरान कुछ खेतों में पोटाश की कमी के लक्षण भी पाए गए। किसानों को फसल की आवश्यकता एवं अनुशंसा के अनुसार संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाने की जानकारी दी गई। लगातार बारिश के दौरान खेत में पानी जमा होने की स्थिति में उर्वरक का प्रयोग नहीं करने तथा मौसम साफ होने के बाद ही कृषि कार्य करने की सलाह दी गई।
अरहर, उड़द एवं मूंगफली की फसलों में भी अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। अरहर में तना झुलसा एवं तना सड़न, उड़द में पीला मोजेक, पाउडरी मिल्ड्यू, सफेद मक्खी एवं फली छेदक तथा मूंगफली में टिक्का/पत्ती धब्बा एवं रस्ट रोग के लक्षणों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई।
कृषि अधिकारियों ने बताया कि 19 से 23 सितंबर के दौरान जिले में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ हल्की वर्षा की संभावना है। इस अवधि में कुछ स्थानों पर गरज-चमक एवं वज्रपात की संभावना को देखते हुए किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
किसानों से खेतों में उचित जल निकासी बनाए रखने, बारिश के दौरान अनावश्यक कृषि कार्य नहीं करने तथा फसलों की नियमित निगरानी करने को कहा गया। गरज-चमक के दौरान खुले खेत में कार्य न करने और सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह भी दी गई।
उपसंचालक कृषि श्री राजेश भारती ने कहा कि वर्तमान मौसम में किसानों को फसल की अवस्था के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनानी चाहिए। लगातार वर्षा की स्थिति में खेतों में जलभराव न होने दें और रोग-कीट के लक्षणों की समय पर पहचान करें। कृषि रसायनों का प्रयोग केवल आवश्यकता एवं अनुशंसा के आधार पर करें। बारिश के दौरान किसी भी कीटनाशी या फफूंदनाशी का छिड़काव नहीं किया जाना चाहिए। मौसम साफ होने के बाद ही अनुशंसित रसायन एवं मात्रा का प्रयोग करें।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार अनंत ने कहा कि धान की पैनिकल इनिशिएशन एवं ईयर हेडिंग अवस्था में पौधों की पोषक तत्वों की मांग बढ़ती है और रोग-कीट के प्रति संवेदनशीलता भी महत्वपूर्ण होती है। लगातार पत्ती गीली रहने, अधिक आर्द्रता और घने पौध समूह के कारण झुलसा एवं शीथ ब्लाइट जैसे रोगों के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है। उन्होंने किसानों को नियमित निगरानी, संतुलित पोषण तथा रोग-कीट की सही पहचान के बाद लक्षित प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।
निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, सोनहत, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं कृषकगण उपस्थित रहे।




