बुलंद टाइम्स न्यूज/अमित दुबे
रतनपुर। धार्मिक एवं पौराणिक नगरी रतनपुर स्थित महामाया धर्मशाला में आज राज्य प्राच्य संस्कृत विद्यालय संघ छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में संभाग स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष स्वामी परमानंद जी महाराज की अगुवाई में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन, प्रचार-प्रसार तथा संस्कृत विद्यालयों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पालिका परिषद रतनपुर के अध्यक्ष लव कुश कश्यप ने की।
कार्यक्रम में संभाग स्तरीय कार्यकर्ताओं के साथ महिला एवं पुरुष पदाधिकारी, संस्कृत विद्यालयों से जुड़े शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
संस्कृत को विशेष भाषा का दर्जा और संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम के दौरान जारी प्रस्ताव एवं उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत भारत भूमि की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है। भारतीय संस्कृति, वेद, पुराण, उपनिषद और विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक ग्रंथों में संस्कृत भाषा का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और संस्कृति की महत्वपूर्ण आधारशिला रही है।
वक्ताओं ने कहा कि प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों और साधु-संतों ने संस्कृत मंत्रों एवं ज्ञान परंपरा के माध्यम से समाज को दिशा देने का कार्य किया। भारतीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं में संस्कृत मंत्रों का विशेष महत्व रहा है। ऐसी महत्वपूर्ण भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए आज सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
संस्कृत विद्यालयों को नियमित अनुदान देने की मांग
बैठक में राज्य प्राच्य संस्कृत विद्यालय संघ छत्तीसगढ़ द्वारा रखे गए विभिन्न उद्देश्यों एवं मांगों पर भी चर्चा की गई। संघ के प्रस्ताव के अनुसार प्रदेश के समस्त मान्यता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों को नियमित अनुदान की पात्रता प्रदान करने तथा पूर्व में संचालित संस्कृत विद्यालयों से संबंधित व्यवस्थाओं को पुनः व्यवस्थित करने की मांग रखी गई।
इसके साथ ही संस्कृत विद्यालयों के संचालन से संबंधित नियमों को सरल एवं सुगम बनाने, संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं विकास को प्राथमिकता देने तथा विद्यालयों और संस्कृत शिक्षा से जुड़े लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया गया।
संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में संस्कृत भाषा के प्रति नई पीढ़ी में रुचि बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाना आवश्यक है। संस्कृत को केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित न रखते हुए शिक्षा, संस्कृति, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर पूर्व संस्कृत बोर्ड अध्यक्ष स्वामी परमानंद जी महाराज ने संस्कृत भाषा की प्राचीनता और उसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आकर अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
संगठन की मजबूती और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा
बैठक में राज्य के समस्त मान्यता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों की एकता, संगठन को मजबूत करने तथा उनकी अपेक्षित मांगों को शासन-प्रशासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। साथ ही संगठन के माध्यम से समय-समय पर संभाग एवं जिला स्तर पर बैठकें आयोजित कर संस्कृत शिक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा करने तथा आवश्यक कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की गई।
कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद रतनपुर अध्यक्ष लव कुश कश्यप सहित संभाग स्तरीय कार्यकर्ताओं, महिला एवं पुरुष सदस्यों तथा आसपास क्षेत्र से पहुंचे नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। महामाया धर्मशाला में आयोजित यह कार्यक्रम संस्कृत भाषा एवं संस्कृत शिक्षा के संरक्षण और संवर्धन को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा का मंच बना।




